Betul Shrimad Bhagwat Katha News:मनुष्य के कर्म ही उसके जीवन का आधार हैं : आचार्य पुष्कर परसाई

Betul Shrimad Bhagwat Katha News: Man's actions are the basis of his life: Acharya Pushkar Parsai

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Betul Shrimad Bhagwat Katha News ;  बैतूल गंज स्थित विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिवस श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा के दौरान आचार्य पुष्कर परसाई जी ने समाज सेवा, सत्कर्म और ईश्वर भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि मनुष्य के कर्म ही उसके जीवन की वास्तविक पहचान होते हैं।
उन्होंने विश्वकर्मा बढ़ई समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज द्वारा जरूरतमंदों की सहायता, कन्या विवाह, शिक्षा, चिकित्सा और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने जैसे कार्य अनुकरणीय हैं। सेवा कार्य ही समाज को मजबूत बनाते हैं और यही सच्ची मानवता है।
आचार्य परसाई ने कहा कि यह स्थान केवल मंदिर नहीं बल्कि आस्था और सेवा का केंद्र है, जहां आने वाले हर व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

अच्छे-बुरे कर्मों का फल निश्चित
कथा में आचार्य ने कर्म और प्रारब्ध का वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति के किए गए कर्म कभी समाप्त नहीं होते। अच्छे कर्म जीवन में सुख, शांति और सम्मान लेकर आते हैं, जबकि बुरे कर्मों का दुष्परिणाम समय आने पर अवश्य सामने आता है।
उन्होंने भीष्म पितामह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मों का प्रभाव कई जन्मों तक बना रहता है। मनुष्य चाहे जितना छिपने का प्रयास करे, उसके कर्म उसे खोज ही लेते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति और सत्संग मनुष्य को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं तथा जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
मृत्यु का सत्य समझना जरूरी
आचार्य पुष्कर परसाई जी ने कहा कि संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य मोह और अहंकार में जीवन बिताता रहता है।
उन्होंने राजा परीक्षित और सुखदेव जी महाराज के प्रसंग के माध्यम से बताया कि जीवन बहुत अनमोल है और इसे व्यर्थ विवाद, निंदा और स्वार्थ में नहीं गंवाना चाहिए। व्यक्ति को समय रहते ईश्वर स्मरण और आत्मचिंतन की ओर बढ़ना चाहिए।

जीवन में अपनाएं संयम और सत्संग
कथा के दौरान आचार्य जी ने भगवान में मन लगाने के लिए संयमित जीवनशैली अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नियमित साधना, प्राणायाम, अच्छे लोगों की संगति और इंद्रियों पर नियंत्रण से मन शांत रहता है और व्यक्ति का जीवन सफल बनता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से सुबह जल्दी उठकर ध्यान, भजन और प्रभु स्मरण करने की अपील की। साथ ही कहा कि जैसा वातावरण और संग व्यक्ति को मिलता है, वैसा ही उसका स्वभाव बन जाता है।

श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण

तीसरे दिन कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भक्ति भाव से कथा श्रवण किया। आकर्षक झांकियों और भजन-कीर्तन ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी कथा में शामिल होने की अपील की।

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