MP News : 13 दिन से लापता अर्चना तिवारी ने किया चौकाने वाला खुलासा, इस तरह से रची थी गुमशुदगी की साजिश
MP News: Archana Tiwari, missing for 13 days, made a shocking revelation, this is how the conspiracy of her disappearance was hatched
MP News : ट्रेन से लापता हुई अर्चना तिवारी को 13 दिन बाद सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में जीआरपी में बड़ा खुलासा किया है। राहुल कुमार लोढ़ा, पुलिस अधीक्षक रेलवे भोपाल ने बताया कि 7 अगस्त को ट्रेन 18233 नमर्दा एक्स, कोच बी-3 बर्थ नम्बर 03 पर अर्चना तिवारी उम्र 29 वर्ष निवासी मंगलनगर थाना रंगनाथ नगर जिला कटनी (म.प्र.) पर अपने घर जाने की यात्रा कर रही थी। घर नहीं पहुचने पर उसके भाई अंकुश तिवारी द्वारा 8 अगस्त को स्वंय थाना जीआरपी कटनी में आकर अपनी बहन अर्चना तिवारी का गुम होने सूचना दी। जीआरपी थाना कटनी द्वारा शून्य पर गुम इंसान की कायमी कर घटना स्थल स्टेशन रानी कमलापति का होने से जीआरपी थाना कटनी से डायरी प्राप्त होने पर थाना जीआरपी रानी कमलापति में असल गुम इंसान कायम कर जाँच में लिया गया। गुमशुदा अचर्ना तिवारी हाई कोर्ट में एडवोकेट एवं सिविल जज तैयारी इंदौर में रहकर कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रेन 18233 के रिर्जवेशन चार्ट एवं संबंधित स्टेशनो से गुजरने वाली ट्रेनों के रिर्जवेशन चार्टी को प्राप्त कर जाँच की गई। जिस कोच में गुम महिला के आस पास के यात्रियो के घर जाकर पूछ ताछ की गई। इसके अलावा सरदही थानों से सम्पर्क कर जानकारी ली गई।2 हजार सीसीटीवी फुटेज कखंगाले
जीआरपी के मुताबिक रेलवे स्टेशन इंदौर, भोपाल, सीहोर, रानी कमलापति, नमर्दापुरम, इटारसी, पिपरिया, करेली, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, बिलासपुर तक व शहरों में लगे लगभग 2 हजार सीसीटीव्ही फुटेजो को खंगाले गये। नमर्दा नदी में लगभग 32 किलोमिटर तक एसडीआरएफ एवं जीआरपी द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया व रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीमे बनाकर पैदल सर्चिग कराई गई। बरखेड़ा से बुदनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद इलेक्ट्रोनिक संसाधानो के माध्यम से संदेही के नम्बर की जानकारी प्राप्त की गई, जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेही की पहचान सारांश जोकचंद के रूप में की जाकर पुछताछ की गई, पुछताछ में गुम महिला अचर्ना तिवारी से सम्पर्क कर नेपाल बॉर्डर धनगढ़ी जिला लखिमपुर खीरी उ.प्र. से बरामद करने में सफलता हासिल की गई।
घर वाले अपने मर्जी से करा रहे थे शादी
पुछताछ में अर्चना तिवारी ने बताया की घर वाले मेरी मर्जी के खिलाफ मेरे लिए शादी के रिश्ते देख रहे थे। कुछ दिन पहले मेरे घरवालो द्वारा बताया गया की तुम्हारे रिश्ते के लिये एक पटवारी लड़का देखा है और इसी प्रकार बार-बार शादी करने के लिए मजबुर कर रहे थे। अर्चना ने बताया कि बार-बार शादी की बात से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। 7 अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए ट्रेन 18233 इंदौर नमर्दा एक्स० से रवाना हुई मै मानसिक रूप से घर जाने के लिए तैयार नही थी रक्षाबंधन के कारण मे घर जाने के लिए रवाना हो गई परंतु मैने सोच लिया की मैं अब घर नहीं जाउंगी और न ही शादी करूंगी।
जब तक में सिविल जज नहीं बन जाती फिर मैंने सोचते सोचते रेलवे स्टेशन इटारसी पहुंचने से पहले मैंने अपने पुराने क्लाइंट तेजेन्दर सिंह जो पंजाब का रहने वाला है वर्तमान में इटारसी में रहता हैं। उससे मदद मांगी की मुझे इटारसी उतरकर वापस इंदौर जाना है, फिर मैंने अपने दोस्त सारांश को भी फोन लगा कर इटारसी बुला लिया था, मैंने इटारसी उतरने से पूर्व ही तेजेंदर को बताया दिया था कि जहां इटारसी स्टेशन पर कैमरे न लगे हो वहा उतार लेना, फिर तेजेंदर नमर्दापुरम स्टेशन से मेरे साथ हो गया। तेजेंदर ने मुझे इटारसी में मेरे दोस्त सारांश के साथ भेज दिया ओर तेजेंदर इटारसी में रूक गया था। इसके बाद सारांश के साथ उसकी कार में बैठकर शुजालपुर आ गई थी। शुजालपुर से इंदौर निकल गई थी इंदौर में घरवालो के आ जाने के डर के कारण विचार के उपरांत में हैदराबाद चली गई। हैदराबाद में 2-3 दिन रूकने के उपरांत पेपर एवं मीडिया रिपोर्ट से मुझे यह जानकारी मिली गई थी मेरा केस काफी चर्चित हो जाने कारण सुरक्षित महसुस नहीं कर रही थी। अर्चना ने बताया कि वह सारांश के साथ 11 अगस्त को हैदराबाद से दिल्ली पहुंच गई ओर दिल्ली से टेक्सी से सारांश के साथ धनगुढ़ी नेपाल पहुंच गई। यहां से धनगुढ़ी से काटमांडु पहुँची। जहां सारांश ने अपने परिचित वायपी देवकोटा से बात कराकर किसी होटल में रूकवाया ओर सारांश वापस इंदौर चला गया। कुछ दिन बाद देवकोटा ने मुझे एक नेपाल की सिम दिलवा दी थी। जिससे में वाट्सअप के माध्यम से सारांश से बात करती रही। सारांश ओर तेजेंदर ने दोस्त होने के कारण मेरी मदद की थी जिससे में नेपाल तक पहुंच गई थी। किसी भी व्यक्ति द्वारा मैरे साथ कोई गलत हरकत नही की। बताया कि सारांश के माध्यम से पुलिस ने मुझसे संपर्क किया और बताया कि आपके परिवार वाले बहुत परेशान है वापस आ जाओ बाद मै काठमांडु से प्लेन से धनगुढ़ी आई बाद धनगुढ़ी से नेपाल बॉर्डर लखीमपुरी पहुंची जहां पर मध्यप्रदेश जीआरपी पुलिस भोपाल की टीम मिले जिनके साथ में जीआरपी थाना रानी कमलापति आ गई।
सराहनीय भूमिका :-
उपुअ (रेलवे) रामस्नेह चौहान निरीक्षक जहीर खान, निरीक्षक संजय चौकसे, निरीक्षक प्रकाश सेन, निरीक्षक बबीता कठेरिया, उप निरी एम एस सोमवंशी, सउनि विजय तिवारी, सउनि आर डी तेकाम, सउनि प्रहलाद यादव, सउनि बृजेश, अनंतराम कुशवाह, प्रआर 669 मनोज सिंह कुशवाह, प्रआर 13 रानू अतुलकर, प्रआर 112 अनिल सिंह, प्रआर. 599 अजय प्रताप सिंह, प्रआर. 313 अमित तिवारी, प्रआर. 633 रविपंदन प्रतापति, प्र.आर. 05 संतोष शुक्ला, आर. 293 दीपक, आर. 207 जुगल किशोर, आर. 31 अनिल कुमार, आर. दीपक अहिरवार, आर 590 संदीप मीणा, आर. 437 राजपाल जाटव, आर. 198 अखलेश चौहान, आर. 134 नंदकिशोर पाराशर आर 437 राजपाल जाटव, आर. 602 ब्रजेश, आर. 01 राहुल शर्मा, म.आर. 02 लक्ष्मी सोमवंशी, प्रआर 495 अमित सक्सेना (सायबर सेल), की सराहनीय भूमिका रही है।



