MP News : सरकार का खजाना खाली, वेतन के पड़े लाले, जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्डों को तीन माह से नहीं मिला वेतन
MP News: Government treasury is empty, salary is in short supply, security guards of district hospital have not received salary for three months
MP News : जिला अस्पताल बैतूल में पदस्थ सुरक्षा गार्डों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। सुरक्षा बजट को लेकर सरकार का खजाना खाली है। अस्पताल प्रशासन को पिछले एक वर्ष से सुरक्षाकर्मियों के संबंध में बजट नहीं दिया। जिसके कारण वेतन की परेशानी खड़ी हो गई है। ठेका कंपनी ने अपने पास की राशि खर्च कर कुछ माह का वेतन दिया, लेकिन अब कंपनी ने सुरक्षा कर्मियों को वेतन देने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। यही हाल रहे तो सुरक्षा व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में 14 महिला-पुरूष सहित 14 सुरक्षा गार्ड मौजूद है। सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार ने निजी कंपनी को दी है। अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने से सुरक्षाकर्मियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। बच्चों को पढ़ाना, लिखाना और घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा गार्डों ने कंपनी से वेतन देने की गुहार लगाई, लेकिन वेतन नहीं दिया गया। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सरकार की तरफ से बजट नहीं मिला, इसलिए वेतन देने में विलंब हो रहा है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जैसे-तैसे कुछ माह तक कंपनी ने अपने स्वंय के बुत्ते सुरक्षा गार्डों को वेतन दिया, लेकिन अब कंपनी के सामने ही समस्या खड़ी हो गई है, इसलिए वेतन नहीं दे पा रहे हैं।एक वर्ष से नहीं मिला बजट
जानकारी के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों को लेकर सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को बजट दिया जाता है। बजट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही कंपनी को राशि दी जाती है। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों को वेतन मिल पाता है। बताया जा रहा है कि जिस कंपनी को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी है। उस कंपनी को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बजट नहीं दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा गार्ड को लेकर पिछले एक वर्ष से सरकार की तरफ से बजट नहीं दिया है। जब भी बजट आ जाएगा, तत्काल भुगतान किया जाएगा, लेकिन अधिकारी भी स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं कि बजट कब तक मिलेगा। यह शासन स्तर की समस्या होने के कारण अधिकारी भी कुछ कहने से बच रहे हैं।



