Betul Today News: जांच शिविर के माध्यम से मिले 416 टीबी मरीज, 20 लाख की जनसंख्या में साढ़े चार लाख लोगों जांच का मिला लक्ष्य, बचाव के लिए जांच जरूरी

Betul Today News: 416 TB patients found through testing camp, target of testing four and a half lakh people in a population of 20 lakh, testing necessary for prevention

Betul Today News: बैतूल स्वास्थ्य विभाग द्वारा 100 दिवसीय निक्षय अभियान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें टीबी की जांच की जा रही है। जांच में जिले में बड़ी संख्या में टीबी के मरीज सामने आए हैं। टीबी जांच शिविर के संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को पत्रकार वार्ता आयोजित की गई।

पत्रकारवार्ता में जिला क्षय अधिकारी डॉ आनंद मालवीय, जिला मीडिया प्रभारी श्रुति गौर तोमर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित 100 दिवसीय निक्षय अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ मालवीय ने बताया कि 7 दिसंबर से ब्लाक स्तरों पर टीबी की जांच के लिए शिविरों की शुरुआत हुई है। जिले की 20 लाख की जनसंख्या में 4 लाख 48 हजार लोगों की टीबी जांच करने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य के मुताबिक अब तक 3 लाख 96 हजार 319 लोगों की स्क्रिनिंग हो चुकी है। 20-20 हजार लोगों के एक्सरे और सीबीसी जांच हो चुकी है।  इस जांच में अब तक 416 टीबी के मरीज पाजीटिव मिले हैं। 24 मार्च तक यह जांच शिविर ब्लाकों में आयोजित किए जाएंगे। ब्लॉकों में आयोजित शिविर में टीबी की जांच की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। डॉ मालवीय ने बताया कि टीबी का समय पर इलाज करने और समय पर दवाई का सेवन करने से 6 माह के भीतर टीबी की बीमारी को खत्म किया जा सकता है। दवाई का कोटा पूरा करना अनिवार्य है। बीच में दवाई का सेवन नहीं छोड़ना चाहिए। 

जिले में टीबी से 6 प्रतिशत लोगों की मौत
जिले में टीबी होने के बाद मरीजों की मौत भी होने लगी है। इसका प्रमुख कारण यह है कि लोग समय पर दवा का सेवन नहीं करते हैं या फिर बीच में ही दवा छोड़ देते हैं। टीबी के भय से जांच नहीं करते हैं और बीमारी बढ़ जाती है। इसके कारण कई मरीजों की मौत भी हो जाती है। जिले में टीबी की मृत्युदर लगभग 6 प्रतिशत है। 7 दिसंबर से आयोजित शिविर में 416 टीबी के मरीज पाजीटिव मिले हैं। अब जिले में कुल टीबी के मरीजों की संख्या बढ़कर 904 पर पहुंच गई। हालांकि राहत भरी बात यह है कि 2014-15 की तुलना में मरीजों की संख्या में धीरे-धीरे गिरावट आई है।
घोड़ाडोंगरी ब्लाक में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज
बैतूल जिले के 10 ब्लाकों से घोड़ाडोंगरी ऐसा ब्लाक है, जहां सबसे ज्यादा टीबी के मरीज है। बैतूल आदिवासी क्षेत्र है। आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण लोग टीबी का इलाज नहीं कराते हैं और बीमारी बढ़ जाती है। घोड़ाडोंगरी ब्लाक आदिवासी क्षेत्र होने के कारण दूरदराज के गांव तक टीबी के संबंध में लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती है। लोग टीबी की बीमारी को गंभीरता से नहीं लेते हैं और घरेलू इलाज करते रहते हैं जिसके कारण टीबी की बीमारी और अधिक बढ़ जाती है। 
टीबी की जांच कराना बेहद जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग टीबी की जांच करने से डरते हैं। यही कारण है कि टीबी की बीमारी विकराल रूप धारन कर लेती है। डाक्टरों का कहना है कि जब भी किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खांसी चले और बलगम में खून आए ऐसे लोगों को टीबी की जांच कराना चाहिए। टीबी जांच करने से डरना नहीं है। टीबी का समय पर इलाज होने पर इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। समय पर जांच नहीं करने की स्थिति में बीमारी बढ़ती है, फिर इसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 के आखरी तक देश को टीबी से मुक्त करने का संकल्प लिया है। इस संकल्प के आधार पर टीबी के खात्मे को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर लगाए जा रहे हैं। 

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