Betul News : पांसे के पैरों के नीचे से खिसकने लगी जमीन, अपने ही छोड़ने लगे साथ, आम जनता भी बना रही दूरी
Betul News: The ground is slipping from under the feet of the dice, its own people are abandoning it, and the general public is also keeping their distance.
Betul News : मुलताई क्षेत्र की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। कभी क्षेत्र की राजनीति का मजबूत चेहरा माने जाने वाले पांसे अब अपने ही नेताओं और समर्थकों को संभालने में संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि उनकी पकड़ धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है और मुलताई क्षेत्र में पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है।
हाल ही में मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दिए हैं कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की एकजुटता में दरार पड़ चुकी है। सबसे बड़ी बात यह रही कि पांसे अपने करीबी माने जाने वाले नेताओं को भी पार्टी छोड़ने से नहीं रोक पाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब पांसे मंत्री बने थे, तब जनता को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं। लोगों को लगा था कि मुलताई क्षेत्र में विकास की नई तस्वीर दिखाई देगी, लेकिन समय के साथ जनता की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। यही कारण रहा कि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अब स्थिति यह बन गई है कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता पहले जैसी नजर नहीं आती।
पांसे की राजनीति पर लंबे समय से यह आरोप भी लगता रहा है कि उन्होंने कांग्रेस में खुद के अलावा किसी दूसरे बड़े चेहरे को उभरने नहीं दिया। पार्टी के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि मुलताई में कांग्रेस की राजनीति एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सीमित होकर रह गई, जिसका नुकसान अब संगठन को उठाना पड़ रहा है। नए नेताओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से भीतर ही भीतर नाराजगी बढ़ती गई।
नगर पालिका अध्यक्ष का भाजपा में जाना केवल एक दल बदल नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन के कमजोर होते ढांचे का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पांसे अपनी खोती राजनीतिक जमीन को वापस हासिल कर पाते हैं या मुलताई की राजनीति में नया चेहरा उभरकर सामने आता है।



