MP Weather Alert :  मध्य प्रदेश के 9 जिलों में बारिश का अलर्ट, बैतूल में बरसे बादल

MP Weather Alert: Rain alert in 9 districts of Madhya Pradesh, clouds rain in Betul

MP Weather Alert :  नया सिस्टम एक्टिव होने से एमपी के कई जिलों में मौसम बदल गया है। बुधवार शाम को बैतूल समेत कई जिलों में बारिश हुई है। बारिश से फसलों को नुकसान पहुँच रहा है। अगले 24 घंटे के दौरान एमपी के बैतूल, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा जिलों में गरज- चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 3 से 4 दिन तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। 

बर्बादी की बारिश: फसलों को नुकसान, कटाई कार्य प्रभावित
बैतूल जिले में बेमौसम हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खासकर कटाई के इस नाजुक समय में बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।  मंगलवार को जिले के चार प्रमुख ब्लॉकों भैंसदेही, भीमपुर, चिचोली और शाहपुर में रुक-रुक कर बारिश होती रही, जिससे कटाई कार्य पूरी तरह से बाधित हो गया है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम को भैंसदेही और भीमपुर ब्लॉकों में जोरदार बारिश हुई। भैंसदेही में 25.0 मिमी और भीमपुर में 3.0 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं, चिचोली और शाहपुर ब्लॉक में भी हल्की बारिश की खबरें सामने आई हैं।
 इन क्षेत्र में खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलें बारिश के चलते भीग गईं, जिससे उनके खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों के अनुसार, वर्तमान समय में  सोयाबीन और मक्का की कटाई का दौर चल रहा है। ऐसे में अगर लगातार बारिश होती रही तो फसलें खेतों में ही सड़ सकती हैं, जिससे न सिर्फ गुणवत्ता प्रभावित होगी बल्कि उपज में भी भारी गिरावट आएगी। किसानों का कहना है कि पहले ही उत्पादन लागत बढ़ चुकी है और अब बारिश से फसलें खराब होने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कुछ किसान अपनी फसलों को बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक शीट और तिरपाल का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यह व्यवस्था हर किसान के लिए संभव नहीं है। जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में रखी थी, उनकी फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
अगले 4 दिनों तक बारिश के आसार
मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन से चार दिन तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जल्द नहीं रुका तो खरीफ सीजन की फसलों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से अब तक किसानों को किसी प्रकार की सहायता या सलाह नहीं दी गई है। किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों का सर्वे कराकर नुकसान की भरपाई की जाए और प्रभावित किसानों को राहत राशि प्रदान की जाए।बारिश के इस असमय प्रकोप ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर खेती-किसानी पर ही पड़ रहा है। 

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