MP Weather Update : एमपी के 19 जिलों में बारिश का अलर्ट, बैतूल में हुई बूंदाबांदी

MP Weather Update: Rain alert in 19 districts of MP, drizzle in Betul

MP Weather Update :  मध्य प्रदेश के कई जिलों में अभी भी मौसम बदला हुआ है। नया सिस्टम एक्टिव होने के कारण मौसम में बदलाव आया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे के दौरान एमपी के नर्मदापुरम, बैतूल, अशोकनगर, शिवपुरी, सिंगरौली, सीधी, अनुपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, छिंदवाडा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, पांढुर्णा जिलों में गरज- चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। 

 

बैतूल मुख्यालय पर बूंदाबांदी

बैतूल। जिले में शनिवार दोपहर अचानक मौसम ने करवट ले ली, जिससे जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में बूंदाबांदी और तेज हवाओं ने लोगों को गर्मी से राहत तो दी, लेकिन किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिला। दोपहर के समय आसमान में घने बादल छा गए और लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगीं। करीब 5 मिनट तक जिला मुख्यालय पर हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से जहां तापमान में गिरावट आई, वहीं उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में जिले में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के साथ मध्यम से भारी बारिश भी हो सकती है।
हालांकि यह मौसम किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया। बूंदाबांदी शुरू होते ही कृषि मंडियों और खरीदी केंद्रों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिन किसानों की फसलें खुले में रखी थीं, वे तुरंत तिरपाल से ढकने में जुट गए ताकि उपज को भीगने से बचाया जा सके। कई स्थानों पर धान और अन्य अनाज खुले में रखा होने से नुकसान की आशंका भी बनी हुई है। समर्थन मूल्य पर चल रही खरीदी केंद्रों में भी स्थिति सामान्य नहीं रही। कई जगह खुले में खरीदी का कार्य प्रभावित हुआ और उपज के परिवहन में भी देरी देखी गई। कर्मचारियों और किसानों ने जल्द से जल्द अनाज को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले एक-दो दिनों तक मौसम इसी तरह अस्थिर बना रह सकता है। ऐसे में किसानों और प्रशासन दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि संभावित बारिश से फसल को नुकसान से बचाया जा सके।

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