MP News: अब अपनी ही बोली में पढ़ाई कर सकेंगे बच्चे, मप्र में जारी हुई नई गाइडलाइन

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MP News: केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा विभिन्न जनजातियों के देशज कला संस्कृति वानस्पतिक विज्ञान और जड़ी बूटी रोग उपचार कौशल को संरक्षण देने के लिए पर्यटन किया जा रहा है। अधिकतर जनजाति के लोग अपने ही भाषा में बात करना पसंद करते हैं और अपने ही भाषा में ज्ञान अर्जन करना भी पसंद करते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के द्वारा अब जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उनके बोली में प्राथमिक शिक्षा देने का मन बनाया है।

इसकी शुरुआत ट्राइबल डोमिनेटेड डिंडोरी जिले से होगी। यह विशेष रूप से पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर रहने वाली बैगा जनजाति के साथ ही गोंड जनजाति भी रहती है। पिछड़ी जनजाति विलुप्त हो रही है और साथ ही उनके बोली और संस्कृति भी विलुप्त हो रही है इसलिए सरकार इन्हें संरक्षित करने के लिए अब बड़ा कदम उठा रही है और अब इस जनजाति के बच्चे अपनी भाषा में ही पढ़ाई कर पाएंगे।

बोली संरक्षित करने के लिए सरकार उठाएगी बड़ा कदम ( MP News )

हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में तैयार की गई शब्दावली को अब बेगानी और गोंडी बोली की शब्दावली में अनुवादित किया जाएगा। जनजाति कार्य विभाग के अधीन ट्राईबल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट भोपाल की पहले से इस परियोजना को राज्य शिक्षा केंद्र के माध्यम से संचालित किया जाएगा। बेगानी बोली के संरक्षण और शिक्षा में उपयोग के लिए शब्दों का संग्रह किया जाएगा और यह प्रयास जनजाति छात्रों को काफी फायदेमंद साबित होगी।

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सरकार के द्वारा इन जनजातियों के उम्दा भविष्य के लिए बड़ा कदम उठाए जा रहा है ताकि उनके पढ़ाई में किसी भी तरह की समस्या नहीं आ पाए। सरकार लगातार विलुप्त हो रही जनजातियों को संरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

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