Wheat Cultivation: गेहूं की फसल खत्म कर देंगे ये रोग, सही समय पर नहीं दिया ध्यान तो बर्बाद हो जाएंगे किसान, ये हैं लक्षण

Wheat Cultivation: रबी सीजन की बुवाई का काम पूरा हो चुका है। इस सीजन में सबसे ज्यादा गेहूं की बुवाई की जाती है लेकिन अच्छे पैदावार के लिए इस फसल को कीटों से बचाने की जरूरत पड़ती है। कई बार ऐसा होता है कि गेहूं की फसल में रोग लगने से किसानों को काफी नुकसान होता है। इन रोगों को दूर करने के लिए किस तरह-तरह के उपाय करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जिसकी मदद से आप गेहूं में लगने वाले रोगों को दूर कर सकते हैं।
गेहूं के फसल में लगने वाले ये पांच रोग ( Wheat Cultivation )
गेहूं की फसल में दीमक
दीमक गेहूं की फसल में काफी ज्यादा लगता है। दीमक के प्रकोप से फसली खराब हो जाती है और इससे फसलों के जड़ों को काफी नुकसान होता है। इससे बचने के लिए गेहूं में किसानों को गोबर डालना चाहिए इसके साथ ही 10 क्विंटल नीम की खली डाल देने से भी यह खत्म हो जाते हैं।
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गेहूं में माहु रोग
यह पंख हैं और हरे रंग के चुभने वाले कीट पतंग होते हैं। यह गेहूं के पत्तियों को चूस जाते हैं। इसके वजह से पूरा फसल खराब हो जाता है। अगर फसल को महू नाम के कट परेशान कर रहे हैं तो आपको फसलों में क़्यूनालफस 25% ई. सी नाम की दवा को 400ml मात्र 500 से 1000 लीटर प्रति अपनी हेक्टेयर दर से छिड़काव करना चाहिए।
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फसल में भूरा रतुआ रोग
यह गेहूं के फसलों के पत्तियों में लगते हैं और इनका रंग नारंगी और भरा होता है। इसके लक्षण पत्तियों के ऊपर और नीचे की सतह पर दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे फसल बड़ी होती है इसका प्रभाव बढ़ने लगता है। इसका प्रकोप कम करने के लिए आपको प्रोपीकोर्नेजॉल 25 ई.सी या टेबूकोनाजोल 25 ई. सी का छिड़काव करना चाहिए।
पीला रतूआ रोग
गेहूं में यह बड़े पैमाने पर लगता है इससे काफी ज्यादा नुकसान होता है। ऐसे में आपको प्रोपी कोर्नेजॉल 25 इसी या टीवीकोनाजोल 25 ई सी का छिड़काव करना चाहिए।



