कम समय में अधिक उत्पादन के लिए खेतों में लगाए पूसा तेजस HI 8759 किस्म की गेहूं, चंद दिनों में हो जाएंगे मालामाल

पूसा तेजस HI 8759 : खरीफ फसलों की कटाई हो गई है और अब किसान रबी फसलों की बुवाई कर रहे हैं।भारत की अधिकतर जनसंख्या कृषि पर निर्भर है और आज किसान आधुनिक तरीके से खेती करके मालामाल बन रहे हैं। गेहूं की आधुनिक किस्मों की खेती करके किसान अच्छी पैदावार कर सकते हैं। भारतीय अनुसंधान संस्थान दिल्ली करनाल और इंदौर के द्वारा गेहूं के कई अच्छी किस्म को विकसित किया गया है।
पूसा तेजस HI 8759 किस्म गेहूं की एक बहुत अच्छी किस्म है। मध्य प्रदेश के किसान बड़े पैमाने पर गेहूं के इस किस्म से खेती करते हैं और इससे पैदावार भी अच्छी होती है। आईए जानते हैं पूसा तेजस HI 8759 किस्म के गेहूं के बारे में विस्तार से…
पूसा तेजस HI 8759

पूसा तेजस HI 8759 गेहूं के बीज उच्च गुणवत्ता वाले बीज है जो की रोग प्रतिरोधक क्षमता के गुणों से भरपूर होता है। इस गेहूं से बनने वाली रोटी पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है। इसके बीज का इस्तेमाल करने से पैदावार अच्छी होती है।
मोटे और चमकदार होते हैं इस किस्म के गेहूं के दाने

कई सालों तक गहन अनुसंधान करने के बाद पूसा तेजस HI 8759 के बीज तैयार की गई है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बुंदेलखंड क्षेत्र में होता है। किसान इस किस्म के गेहूं के बीज से काफी अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। इस किस्म के गेहूं से चपाती, ब्रेड, बिस्कुट आदि तैयार किया जाता है। यही वजह है कि इस किस्म का उपयोग खेती के लिए किसान बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।
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इस बीज से कम समय में तैयार होती है फसल
गेहूं की यह किस्म पूसा तेजस HI 8759 नई दिल्ली के द्वारा कई वर्षों के गहन रिसर्च एवं वैज्ञानिकों की टीम द्वारा भारी खर्च वाले अनुसंधान कार्य के पश्चात् जारी किया गया है। इस किस्म के गेहूं के दाने बड़े-बड़े होते हैं और चमकदार होते हैं। इससे 70 से 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है। सबसे बड़ी बात है कि इसमें अधिक सिंचाई की जरूरत भी नहीं होती है। इस गेहूं के फसलों की ऊंचाई काफी होती है, वहीं इसके दाने भी काफी अच्छे होते हैं।
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अपने क्षेत्र के हिसाब से करें बीज का चयन

किसानों को गेहूं का पैदावार बढ़ाने के लिए अपने इलाके के अनुसार उपयुक्त किस्म के गेहूं का चयन करना चाहिए। प्रयास करें कि नवंबर तक गेहूं की बुवाई कर लें, क्योंकि देरी से बुवाई करने पर पैदावार पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है। सही समय पर बुवाई करके अच्छा उत्पादन कर सकते हैं।



