Moti ki kheti : मध्य प्रदेश में मोतियों की खेती से होगी बंपर कमाई, किसानों को ट्रेनिंग दे रही सरकार

Moti ki kheti : मध्य प्रदेश के किसान भाइयों के लिए अच्छी खबर है। आधुनिकता के समय में किसान नए-नए प्रयोग से नई फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। कई किसान तो ऐसे हैं जो गेहूं, चना, सोयाबीन जैसी फसलों को सालों पहले उत्पादित करना छोड़ चुके हैं। यह किसान नई-नई तकनीक और नए-नए संसाधनों की मदद से नई फसलों का उत्पादन करते हैं और लाखों रुपए तक मुनाफा कमाते हैं।
मध्यप्रदेश में अब किसान भाई मोतियों की खेती भी कर सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के लिए छिंदवाड़ा को मॉडल जिले के रूप में चयनित किया गया है, जो भी किसान कम भूमि पर अच्छी कमाई करना चाहते हैं, वह इस मोतियों की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
आजकल कृषि विज्ञान केंद्र में हो रही मोती की खेती (Moti ki kheti )
मध्य प्रदेश के किसान खेतों में फसलो के साथ-साथ मोती की खेती कर सकते हैं और अपनी किस्मत चमका सकते हैं। आपको बता दे की छिंदवाड़ा के कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को मोती की खेती की ट्रेनिंग दी जा रही है। छिंदवाड़ा, सिवनी और जबलपुर सहित दूसरे जिलों के किसान मोती की खेती करने के गुर सीख रहे हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में मोती की खेती हो रही है। 2019 में कृषि विज्ञान केंद्र चंदन गांव में पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत से शुरू किया गया था।
मोती की खेती की ट्रेनिंग
कृषि विज्ञान केंद्र की प्रोग्राम असिस्टेंट चंचल भार्गव ने जानकारी दिया कि ” उन्होंने मोती की खेती के लिए जयपुर से ट्रेनिंग प्राप्त किया है और वहीं उन्होंने सीखा की किस तरह मोती की खेती की जाती है। इसके बाद वह छिंदवाड़ा में किसानों को इसकी ट्रेनिंग दे रहे हैं।
किसानों को दी जा रही है इसकी ट्रेनिंग
कृषि विज्ञान केंद्र चंडनगांव छिंदवाड़ा में विकसित भारत के अंतर्गत मोती पालन परियोजना का जबलपुर संभाग कमिश्नर अभय वर्मा ने प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का जायजा भी लिया। महिलाओं को भी मोती की खेती की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इस तरह करें मोती की खेती
मोती की खेती करने के लिए किसानों को सबसे पहले एक तालाब की जरूरत पड़ती है।तालाब का आकार 50 फीट चौड़ा, 80 फीट लंबा और 12 फीट गहरा होना चाहिए। इसमें मोतियों के बीज डाल दिए जाएंगे और फिर 15 से 18 महीने में मोती बनकर तैयार हो जाता है। मोतियों की खेती के लिए शिव को नदियों में इकट्ठा करना पड़ता है। आप चाहे तो सिर्फ बाजार से भी खरीद सकते हैं और इसके बाद हर सीट में एक छोटी सी शल्य क्रिया के बाद उसके भीतर 4 से 6 एमएम डायमीटर वाले साधारण गोल्ड डिजाइन वाली विड डाल दिया जाता है।
इन सीपों को नायलॉन बैग में रखकर बांस के सहारे लटका दिया जाता है।तालाब में 1 मीटर की गहराई पर फिर से छोड़ा जाता है. प्रति हेक्टेयर 20 हजार से 30 हजार सीपों में मोती का पालन किया जा सकता है।
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