Nag Panchami 2025 : नागपंचमी कल, बना शुभ योगों का विशेष संयोग नागदेवता को दूध अर्पण करने की परंपरा
Nag Panchami 2025 : Nag Panchami tomorrow, a special combination of auspicious yogas is created, tradition of offering milk to the serpent god
Nag Panchami 2025 : सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सोमवार रात 11.25 बजे से नागपंचमी का शुभारंभ होगा और मंगलवार, 29 जुलाई को पूरे जिले में यह पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस दिन नागदेवता को दूध अर्पित किया जाता है।इस बार नागपंचमी पर शिव संयोग, रवि संयोग और लक्ष्मी संयोग जैसे तीन विशेष योग बन रहे हैं, जो इस पर्व को और भी अधिक फलदायी बना रहे हैं। पंचांग के अनुसार ये तीनों संयोग अत्यंत शुभ माने जाते हैं। साथ ही मंगलवार का दिन होने से मंगला गौरी व्रत का संयोग भी रहेगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।
नागपंचमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसमें नागदेवता की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा और उन्हें दूध अर्पित करने से कालसर्प दोष, सर्प भय और अन्य बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में नागपंचमी को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
शहर के टिकारी नागदेव मंदिर, गंज नागदेव मंदिर, कोठीबाजार नागदेव मंदिर, सदर नागदेव मंदिर तथा इटारसी रोड नागदेव मंदिर सहित शहर के विभिन्न मंदिरों में नागदेवता की पूजा-अर्चना करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमडेंगी।
सावन के तीसरे सोमवार मंदिरों में रही भीड़
सावन मास के तीसरे सोमवार को जिले के सभी शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही शिवालयों में दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, दूध, जल, धतूरा और फूल अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का पूजन किया। कोठीबाजार शिव मंदिर, गंज शिव मंदिर, विनोवा वार्ड शिव मंदिर, बडोरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर सहित भोपाली छोटा महादेव, सालबर्डी शिव मंदिर समेत ग्रामीण अंचलों के शिवालयों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। विशेष पूजन-अर्चना के साथ भक्तों ने व्रत रखकर भगवान शिव से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। इस अवसर पर कई मंदिरों में भजन संध्या, रुद्राभिषेक, हवन और आरती का आयोजन भी किया गया। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।



