De-Addiction Campaign : दिन में नशा मुक्ति की शपथ, शाम को पीते शराब , नशा मुक्ति अभियान बनकर रह गया सिर्फ दिखावा !
De-Addiction Campaign: Pledge of de-addiction during the day, drinking alcohol in the evening, de-addiction campaign remained just a sham!
De-Addiction Campaign : बैतूल जिला प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग द्वारा चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। यह अभियान लोगों की दोहरे चरित्र और पाखंड को उजागर कर रहा है। दिन में लोग मंच पर शपथ लेते हैं कि वे नशा नहीं करेंगे, लेकिन वहीं लोग शाम होते ही शराब के अड्डों पर नजर आते हैं। अफसोस की बात यह है कि इस पाखंड में केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि कुछ अधिकारी वर्ग के लोग भी शामिल हैं।7000 लोगों को दिलाई गई शपथ, लेकिन असर नदारद
सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 1 जून से 26 जून तक जिले में नशा मुक्ति अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब 7000 लोगों को नशा छोड़ने की शपथ दिलाई गई। हालांकि कितने लोगों ने वास्तव में नशा छोड़ा, इसकी कोई निगरानी या रिपोर्ट नहीं है। शपथ तो दिलाई जा रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
अभियान का उद्देश्य अच्छा, लेकिन रवैया उदासीन
नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील विषय पर चलाए जा रहे अभियान का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन यदि इसे गंभीरता से न लिया जाए, तो यह महज दिखावा बनकर रह जाता है। जब तक लोग खुद में बदलाव नहीं लाएंगे और जिम्मेदार अधिकारी इसका सख्ती से पालन नहीं कराएंगे, तब तक यह अभियान कागज़ों तक ही सिमट कर रह गया है। इस अभियान के तहत जानकारी के लिए जिला सामाजिक न्याय विभाग अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।



