Betul News : बैतूल स्वास्थ्य विभाग में भर्ती का ‘महाघोटाला’! नौकरी के नाम पर लाखों की वसूली, सीएमएचओ कार्यालय पर 8 गंभीर आरोप
Betul News: A massive recruitment scam in the health department! Lakhs of rupees extorted in the name of jobs, 8 serious allegations against the CMHO office.

Betul News : बैतूल जिले के स्वास्थ्य विभाग में ग्रुप-डी भर्ती को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है तमाम प्रयासों और कड़े निर्देशों के बावजूद सीएमएचओ कार्यालय और जिला चिकित्सालय के हालात नहीं सुधर रहे हैं। इसकी सीधी सी और बड़ी वजह यह है कि जिम्मेदार अफसर हालात सुधारने के बजाय अपना स्वार्थ साधने में जुटे हुए हैं। ऐसा ही एक बड़ा मामला और सामने आया है। इसमें सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े के खिलाफ सीधे-सीधे 8 पेज का आरोप पत्र संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा भोपाल द्वारा जारी किया गया है। इस आरोप पत्र में डॉ. मनोज हुरमाड़े पर आउटसोर्स वर्कर की भर्ती के संबंध में गंभीर वित्तीय अनियमितता करने, स्वयं के लाभ हेतु नियम विरूद्ध निजी कंपनी को भुगतान कर शासन को आर्थिक हानि पहुंचाने के आरोप लगे हैं, जो कि गंभीर कदाचरण और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आते हैं।
9 जुलाई 2026 को जारी आरोप पत्र में 3 बिंदुओं में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसमें डॉ. मनोज हुरमाड़े के कृत्य को शासन को वित्तीय हानि पहुंचाने वाला और गंभीर वित्तीय अनियमितता का बताया गया है। इतना ही नहीं डॉ. मनोज हुरमाड़े और सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ भीमराव लोखंडे पर अपने एजेंटों के माध्यम से प्रति व्यक्ति भर्ती के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये नौकरी लगाने के एवज में वसूलने और अपने रिश्तेदारों को नौकरी पर रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। जिसे शासन ने गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय धनराशि का गबन माना है।
संचालनालय ने शुरू की कार्रवाई
इन सभी को लेकर मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। संचालनालय ने आरोप पत्र जारी करते हुए उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। यदि निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो विभाग एकपक्षीय कार्रवाई भी कर सकता है।
गंभीर अनियमितताओं के लगे आरोप
आरोप पत्र में डॉ. हुरमाड़े पर आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, भुगतान और भर्ती प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं सहित तीन प्रमुख आरोप लगाए गए हैं। संचालनालय का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला शासकीय नियमों के उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है।
बिना टेंडर के पुरानी एजेंसी को काम
आरोप पत्र के अनुसार वर्ष 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने ग्रुप-डी आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। आरोप है कि बैतूल में बिना नया टेंडर जारी किए पहले से कार्यरत ज्यूस इंटरप्राइजेस भोपाल को ही दोबारा काम सौंप दिया गया। आरोप पत्र में कहा गया है कि एजेंसी का पूर्व अनुबंध 31 जुलाई 2025 तक था, लेकिन उससे पहले ही 23 जुलाई 2025 को उसे फिर से कार्य करने की अनुमति दे दी गई।
बिना अनुशंसा के कार्यादेश किए जारी
संचालनालय का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया शासन के भंडार क्रय नियमों के विपरीत थी और कलेक्टर की अनुशंसा के बिना ही कार्यादेश जारी कर दिए गए। इससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा तथा नियमों का उल्लंघन हुआ।
कलेक्टर ने भी जताई थी आपत्ति
अभिकथन पत्र में उल्लेख किया गया है कि अनुबंध अवधि बढ़ाने संबंधी फाइल पहले तत्कालीन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत की गई थी।कलेक्टर ने केवल फाइल का अवलोकन किया था और स्पष्ट किया था कि अवलोकन का अर्थ स्वीकृति नहीं माना जा सकता। बाद में जब वही फाइल दोबारा प्रस्तुत की गई तो कलेक्टर ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि उनके मौखिक निर्देशों के बावजूद शासन के नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस मामले में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। इसके बाद एक चार सदस्यीय समिति गठित की गई, लेकिन जांच में यह सामने आया कि कार्यादेश पहले ही जारी किया जा चुका था। जांच दल ने इस आरोप को आंशिक रूप से सिद्ध माना है।
250 कर्मचारियों की जगह 450 का भुगतान
दूसरा और सबसे गंभीर आरोप आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़ा है। आरोप पत्र के अनुसार वर्ष 2024-25 में जिले में लगभग 250 ग्रुप-डी आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत थे। इसके बावजूद दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में करीब 450 कर्मचारियों के नाम पर भुगतान किया गया। विभाग का कहना है कि लेखापाल भीमराव लोखंडे के साथ मिलकर ज्यूस इंटरप्राइजेस भोपाल को वास्तविक संख्या से कहीं अधिक कर्मचारियों का भुगतान किया गया। इससे शासन को वित्तीय हानि हुई और वरिष्ठ कार्यालय को भी गलत जानकारी दी गई।
लाखों रुपये का किया फर्जी भुगतान
जांच समिति के अनुसार दिसंबर 2025 में 445 कर्मचारियों के नाम पर लगभग 98.61 लाख रुपये सहित 2.57 लाख और 3.16 लाख के भुगतान किए गए, जबकि उपलब्ध उपस्थिति पत्रक में केवल 428 कर्मचारियों का रिकॉर्ड मिला। इसी तरह जनवरी 2026 में भी 13 फरवरी 2026 को 98.61 लाख, 2.57 लाख और 3.16 लाख का भुगतान किया गया व वेतन हाजरी पत्रक 425 कर्मचारियों का उपलब्ध कराया गया। संचालनालय ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
भर्ती के लिए नहीं निकाला कोई विज्ञापन
तीसरा आरोप भर्ती प्रक्रिया को लेकर है। आरोप पत्र में कहा गया है कि ज्यूस इंटरप्राइजेस ने भर्ती के लिए किसी भी प्रकार का सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्तियां कर दी गईं। जांच में एजेंसी ने बताया कि वर्ष 2024 से उसके पास नौकरी के लिए पहले से आवेदन जमा थे और उन्हीं आवेदनों में से आवश्यकता के अनुसार लोगों का चयन किया गया। हालांकि जांच समिति ने पाया कि भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक सूचना या विज्ञापन जारी नहीं किया गया था।
नौकरी के नाम पर लाखों लेने के आरोप
आरोप पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रभातपट्टन, आठनेर, भैंसदेही, मुलताई, आमला, चिचोली, सेहरा, भीमपुर, शाहपुर, घोड़ाडोंगरी और बैतूल क्षेत्र में एजेंटों के माध्यम से भर्ती कराई गई। दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि प्रति व्यक्ति एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली गई तथा कुछ रिश्तेदारों को भी नौकरी दी गई। हालांकि आरोप पत्र में इन आरोपों को जांच का हिस्सा बताया गया है और विभागीय कार्रवाई इन्हीं आरोपों के आधार पर की जा रही है।
एक पखवाड़े में मांगा गया जवाब
संचालनालय ने डॉ. मनोज हुरमाड़े को आरोप पत्र प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर अपना लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं। उन्हें यह विकल्प भी दिया गया है कि यदि वे व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं या अपने पक्ष में गवाह अथवा दस्तावेज प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उसकी जानकारी भी निर्धारित समय में दें। यदि समय सीमा के भीतर जवाब प्राप्त नहीं होता है तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर एकपक्षीय विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
आचरण नियमों के उल्लंघन का भी आरोप
संचालनालय का कहना है कि प्रथम दृष्टया डॉ. हुरमाड़े द्वारा अपने पद के दायित्वों का उचित निर्वहन नहीं किया गया तथा वित्तीय नियमों और शासकीय आचरण नियमों का पालन नहीं किया गया। फिलहाल यह मामला विभागीय जांच के अधीन है। आरोप पत्र जारी होने के बाद अब आगे की कार्रवाई डॉ. हुरमाड़े के जवाब और विभागीय जांच की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। इस पूरे मामले को लेकर जानकारी और सीएमएचओ का पक्ष जानने के लिए डॉ हुरमाड़े से संपर्क किया गया लेकिन उनसे संपर्क नही हुआ।


