Betul News : बैतूल के सभी ब्लॉकों में सिरपुर पैटर्न के एक-एक मिनी वाटरशेड चिन्हित कर अक्टूबर तक शुरू करें जल संरक्षण कार्य : विधायक श्री खंडेलवाल
Betul News: Identify one 'Sirpur pattern' mini-watershed in each block of Betul and commence water conservation work by October: MLA Mr. Khandelwal.
बैतूल के सभी ब्लॉकों में सिरपुर पैटर्न के एक-एक मिनी वाटरशेड चिन्हित कर अक्टूबर तक शुरू करें जल संरक्षण कार्य : विधायक श्री खंडेलवाल
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सिरपुर पैटर्न से बारिश के पानी को रोककर भूजल स्तर बढ़ाने और जलसंकट के स्थायी समाधान पर हुआ मंथन
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प्रोजेक्ट डायरेक्टर वाटर कंजरवेशन एवं सिरपुर पैटर्न के विशेषज्ञ श्री एस.बी. खानापुरकर ने सिरपुर पैटर्न पर दी जानकारी
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Betul News : बैतूल में सिरपुर पैटर्न के सफल प्रयोग को देखते हुए जिले के सभी विकासखंडों में जल संरक्षण के लिए एक एक मिनी वाटरशेड उपयुक्त स्थान चिन्हित कर अक्टूबर तक कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बैतूल हेमन्त खंडेलवाल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए।
बैठक में विधायक खंडेलवाल के आग्रह पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर वाटर कंजरवेशन एवं सिरपुर पैटर्न के विशेषज्ञ श्री एस.बी. खानापुरकर बैतूल आए और उन्होंने महाराष्ट्र के सिरपुर में जल संरक्षण के सफल प्रयोग तथा बैतूल में इसके माध्यम से जल समस्या के स्थायी समाधान की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि स्थानीय भूगर्भीय संरचना और जल प्रवाह का वैज्ञानिक अध्ययन करते हुए जल संरक्षण के कार्य किए जाएं तो बारिश के पानी को अधिक से अधिक रोककर भूजल पुनर्भरण किया जा सकता है।
बारिश के पानी को रोककर एक्विफर रिचार्ज पर जोर
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि सिरपुर पैटर्न का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को तेजी से बह जाने से रोकना, उसे जल संरचनाओं में संग्रहित करना तथा एक्विफर (भूजल भंडार) में रिचार्ज करना है। इसके लिए क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना का विस्तृत अध्ययन कर तकनीक आधारित जल संरक्षण कार्य किए जाने पर जोर दिया गया।
प्रस्तुतीकरण के अनुसार मौसमी नालों एवं जलधाराओं को जल संरक्षण के विभिन्न उपायों के माध्यम से अधिक स्थायी जलधारा में परिवर्तित करने तथा जल स्तर में वृद्धि का लक्ष्य रखा जाता है। साथ ही पानी के विवेकपूर्ण उपयोग को भी इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
200 से 300 मीटर की दूरी पर चेक डैम
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि भूगर्भीय अनुकूलता के आधार पर बंधानों/चेक डैम की दूरी 200 से 300 मीटर की रखी जा सकती है। इसके साथ ही तकनीकी रूप से उपयुक्त पूरे जलग्रहण क्षेत्र में कंटूर कंट्रोल ट्रेंच (CCT) जैसे जल संरक्षण कार्य किए जाने की अवधारणा बताई गई।
मिनी वाटरशेड के उदाहरण के माध्यम से प्रत्येक जलधारा पर उसकी ढाल और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चेक डैम बनाने, उनके ऊपरी हिस्से में जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने तथा संरचनाओं को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की जानकारी दी गई।
प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि वर्षा ऋतु के बाद खुदाई एवं जल संग्रहण से संबंधित कार्यों के माध्यम से प्रत्येक चेक डैम में बड़ी मात्रा में पानी का संचयन संभव है। इससे भूजल पुनर्भरण के साथ आसपास के क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सिंचाई, पेयजल और उद्योग के लिए उपयोगी
विशेषज्ञ ने सिरपुर पैटर्न को सिंचाई, पेयजल और
औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए स्थायी जल उपलब्धता की दिशा में उपयोगी बताया। साथ ही जल संरक्षण के माध्यम से बाढ़ एवं सूखे की समस्या को कम करने तथा सूख चुकी नदियों एवं जलधाराओं के पुनर्जीवन की संभावनाओं पर भी जानकारी दी।
बैठक में बैतूल जिले के पूर्व से बने सिरपुर पैटर्न नयेगांव, जगदर एवं परसोड़़ी भोगीटेढ़ा में सिरपुर पैटर्न से लाभान्वित किसानों के अनुभवों की जानकारी भी साझा की गई। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्यों से हुए बदलावों और किसानों को प्राप्त लाभों पर चर्चा हुई।
बैठक में विधायक आमला डॉ. योगेश पंडाग्रे, विधायक मुलताई श्री चंद्रशेखर देशमुख, जिला विकास सलाहकार समिति सदस्य श्री सुधाकर पवार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री हंसराज धुर्वे, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, जिला पंचायत सीईओ श्री गणेश जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश खरपूसे सहित संबंधित अधिकारी एवं सिरपुर पैटर्न से लाभान्वित किसान उपस्थित रहे।

