Betul Bus Strike : नई परिवहन नीति के विरोध में होली के पहले बसों के थमेंगे पहिए, लोगों की बढ़ेगी परेशानी

Betul Bus Strike: Buses will stop before Holi in protest against the new transport policy, increasing public problems.

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Betul Bus Strike :  नई परिवहन नीति के विरोध में जिले के बस मालिकों और ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। हड़ताल को लेकर बस संचालक संगठनों ने अपनी बसों पर सूचना चस्पा कर आम नागरिकों को पहले से आगाह करना शुरू कर दिया है, ताकि यात्रियों को अचानक परेशानी का सामना न करना पड़े। बसों पर लगाए गई सूचना में स्पष्ट लिखा है कि सरकार की नई नीति के विरोध में 2 मार्च से बसों का संचालन बंद रहेगा।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नई परिवहन व्यवस्था के तहत ‘सुगम लोक सेवा योजनाÓ लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत सार्वजनिक परिवहन सेवा को अधिक व्यवस्थित और किफायती बनाने का दावा किया गया है। सरकार की योजना के अनुसार बसों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाएगा। साथ ही बसों की निगरानी के लिए एक मोबाइल एप और हेड बोर्ड प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों को समय-सारणी और रूट संबंधी जानकारी आसानी से मिल सके।
हालांकि बस मालिकों और ऑपरेटरों का कहना है कि नई नीति से निजी बस संचालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और धीरे-धीरे परिवहन सेवा सरकारी नियंत्रण में चली जाएगी। उनका आरोप है कि यह नीति निजी बस व्यवसाय को कमजोर करने वाली है। बस मालिकों का यह भी कहना है कि यदि सरकार द्वारा निर्धारित शर्तें लागू की गईं तो संचालन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर किराए पर पड़ेगा और अंतत: आम जनता को महंगी यात्रा करनी पड़ेगी।
बस संचालकों ने सरकार की नीतियों को दमनकारी बताते हुए विरोध तेज करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करेगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
होली से पहले हड़ताल से बढ़ेगी मुश्किले
इधर, होली पर्व से ठीक पहले प्रस्तावित हड़ताल से आम नागरिकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। त्योहार के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग नौकरी, व्यवसाय या पढ़ाई के सिलसिले में बाहर से अपने घर लौटते हैं। ऐसे समय में बस सेवा बंद होने से यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से वे लोग ज्यादा प्रभावित होंगे जिनके पास निजी वाहन नहीं हैं। जिला मुख्यालय से प्रतिदिन सैकड़ों बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित होती हैं। ये बसें भोपाल, इंदौर, नागपुर, जबलपुर और छिंदवाड़ा जैसे प्रमुख शहरों तक आवागमन करती हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों और ब्लॉकों तक भी बसों के माध्यम से ही लोगों की आवाजाही होती है। यदि हड़ताल लंबी चली, तो यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ेगी, जिससे किराए में वृद्धि और भीड़भाड़ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल प्रशासन और बस संचालकों के बीच किसी समाधान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आमजन को अब सरकार और बस मालिकों के बीच होने वाली संभावित बातचीत का इंतजार है, ताकि होली से पहले स्थिति स्पष्ट हो सके और परिवहन व्यवस्था सुचारु रह सके। 

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