Betul Digital Arrest News : पुलवामा और दिल्ली बम धमाकों में टेरर फंडिंग में नाम होने का हवाला देकर बैतूल में बुजुर्ग को 3 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 73 लाख की साइबर ठगी टली

Betul Digital Arrest News: Citing his involvement in terror funding in the Pulwama and Delhi bomb blasts, an elderly man in Betul was placed under digital arrest for days, averting a cyber fraud of Rs 73 lakh.

Betul Digital Arrest News:  बैतूल जिले में डिजिटल अरेस्ट का मामला सामने आया है। पुलिस और परिजनों की सतर्कता से बड़ी ठगी टली है। साइबर ठगी ने पुलवामा टेरर फंडिंग में नाम होने की बात कहकर WCL कर्मचारी की 3 दिन तक डिजिटल  अरेस्ट रखा। आरोपी अपने आप की ईडी और सीबीआई अधिकारी बता रहे रहे थे। मंगलवार को बैतूल पुलिस कंटोल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन, एएसपी कमला जोशी, प्रमुख रूप से उपस्थिति थे। घटना का खुलासा करते हुए बताया कि 1 दिसंबर 2025 को सूचना मिली थी कि  राजेश गेस्ट हाउस बगडोना (थाना सारणी क्षेत्र) में एक व्यक्ति को साइबर ठगों द्वारा तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट में फंसाकर धमकाया जा रहा है। ठग वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को ईडी व सीबीआई अधिकारी बताकर पीडित को गलत लेन-देन के झूठे आरोप में भयभीत कर रहे थे तथा मामले को दबाने के नाम पर बड़ी धनराशि की मांग कर रहे थे।
पीड़ित चैतराम नरवरे, उम्र 64 वर्ष, निवासी अशोका गार्डन भोपाल (रिटायर्ड डब्लूसीएल कर्मचारी) अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर से ठगों के कहने पर पाथाखेड़ा आ गए थे। ठगों ने उन्हें होटल में रुकवाकर परिवारजन व परिचितों से सपर्क करने से भी रोक दिया। पीड़ित अपनी जीवन भर की जमा पूजी, जो एसबीआई पाथाखेड़ा शाखा में एफडी के रूप में थी, उसे तुड़वाकर ठगों को देने के लिए बैंक से आरटीजीएस फॉर्म तक लेकर आए थे।
तत्काल सूचना पर चौकी प्रभारी पाथाखेड़ा उप निरीक्षक मनोज कुमार उइके, प्रधान आरक्षक ज्ञानसिंह तेकाम, आरक्षक रविमोहन, आरक्षक राकेश करपे तथा सैनिक सुभाष की टीम राजेश गेस्ट हाउस पहुंची। टीम ने पीड़ित को सुरक्षित बाहर निकालकर विस्तृत रूप से बातचीत की। पीड़ित मानसिक रूप से सदमे की स्थिति में था और तीन दिनों से चल रहे घटनाक्रम पर विश्वास नहीं कर पा रहा था।
पीडित को सुरक्षित चौकी लाकर पूरी घटना विस्तार से जानी गई तथा उनके परिवारजनों से संपर्क स्थापित किया गया। इस दौरान थाना प्रभारी बैतूल बाजार सुश्री अंजना धुर्वे ने भी पीडित के बड़े भाई से संपर्क कर परिजनों को पुलिस चौकी पाथाखेड़ा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यदि समय रहते यह त्वरित पुलिस कार्रवाई नहीं की जाती, तो साइबर ठग पीड़ित से उसकी जीवन भर की मेहनत की पूरी कमाई हड़प लेता
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन की आमजन से अपील –
“जनसामान्य से अनुरोध है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई शब्द या प्रक्रिया भारतीय कानून में कहीं भी अस्तित्व में नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी-चाहे वह पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य विभाग हो-वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी व्यक्ति को न तो गिरफ्तार कर सकती है और न ही धनराशि की मांग कर सकती है।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं को अधिकारी बताकर ऑनलाइन माध्यम से आपको डराने या धमकाने का प्रयास करता है, तो समझ लें कि यह साइबर ठगी है। कृपया ऐसी किसी भी कॉल पर विश्वास न करें, अपनी निजी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) अथवा नजदीकी थाने को सूचना दें।आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है- पुलिस सदैव आपकी सहायता हेतु तत्पर है।

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