Ganesh Chaturthi 2025 : इस वर्ष भी रहेगा गणेश प्रतिमाओं का टोटा, मूर्तिकारों को नहीं मिल रही मिट्टी, मूर्तियों के बढ़े दाम

Ganesh Chaturthi 2025: There will be a shortage of Ganesh idols this year too, sculptors are not getting clay, prices of idols have increased

Ganesh Chaturthi 2025 :  गणेश चतुर्थी का पर्व नजदीक आते ही जिले भर में मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हो गए हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी गणेश प्रतिमाओं की मांग बड़ी संख्या में है, लेकिन प्रतिमा बनाने के लिए जरूरी मिट्टी की किल्लत और महंगी होती सामग्री के कारण मूर्तिकारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि इस बार गणेश प्रतिमाओं का टोटा देखने को मिल सकता है और जो प्रतिमाएं तैयार होंगी, वे पिछले वर्षों की तुलना में महंगी मिलेंगी।
मूर्तिकारों के अनुसार प्रतिमा बनाने के लिए खास किस्म की चिकनी मिट्टी की जरूरत होती है। यह मिट्टी जिले के आसपास सोनाघाटी क्षेत्र से मिलती थी, लेकिन इस बार वहां से पर्याप्त मात्रा में मिट्टी नहीं मिल पाई है। मजबूरन मूर्तिकारों को दूर-दराज के इलाकों से मिट्टी मंगवानी पड़ रही है। मिट्टी के परिवहन पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है, जिससे प्रतिमाओं की लागत बढ़ गई है। कई मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी की कमी के कारण इस बार वे पिछले साल की तुलना में कम प्रतिमाएं ही बना पाएंगे।
बढ़ी लागत, महंगी होंगी प्रतिमाएं
मिट्टी के साथ-साथ रंग, कपड़ा, सजावट और अन्य सामान की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। मूर्तिकार गणेश प्रजापति ने बताया कि सिर्फ रंगों के दाम ही 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा सजावटी सामान और अन्य जरूरी सामग्री भी महंगी हो गई है। इस कारण इस बार गणेश प्रतिमाएं बाजार में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक कीमत पर बिकेंगी। जहां पहले 2 से 3 फीट की प्रतिमा 1500 से 2000 रुपये तक मिल जाती थी, वहीं अब उनकी कीमत 2000 से 2500 रुपये तक पहुंच सकती है। बड़ी प्रतिमाओं के दाम तो और भी अधिक होंगे।
बारिश से नहीं सूख रहीं प्रतिमाएं
इस बार लगातार हो रही बारिश ने भी मूर्तिकारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कच्ची प्रतिमाओं को सूखने के लिए सामान्य धूप और हवा की जरूरत होती है, लेकिन मौसम खराब रहने से प्रतिमाएं ठीक से सूख नहीं पा रही हैं। मजबूरन मूर्तिकारों को गैस और लकड़ी जलाकर प्रतिमाओं को सुखाना पड़ रहा है। इससे प्रतिमाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है और लागत में इजाफा हो रहा है। कई जगहों पर मूर्तिकारों ने बारिश से बचाने के लिए शेड और तिरपाल का इंतजाम किया है, लेकिन इससे खर्चा और बढ़ गया है।
मांग ज्यादा, आपूर्ति कम
जिले में गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गांव-गांव और मोहल्लों में गणेश मंडल स्थापित होते हैं। हर साल हजारों की संख्या में प्रतिमाएं बिकती हैं। इस बार भी मांग काफी ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति कम होने की संभावना जताई जा रही है। मूर्तिकारों का कहना है कि वे जितनी प्रतिमाएं बनाना चाहते थे, मिट्टी की कमी और बारिश के कारण उतनी तैयार नहीं कर पाएंगे। ऐसे में बाजार में गणेश प्रतिमाओं का टोटा देखने को मिल सकता है।

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