Waste To Energy Project In MP:मध्य प्रदेश के इन शहरों में कचरे से बनेगी बिजली, शुरू हुई तैयारी

Waste To Energy Project In MP: मध्य प्रदेश में स्वच्छ बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सरकार काफी तेजी से कम कर रही हैं। एक तरफ कचरे के निष्पादन और शहर साफ हो रहे हैं, वहीं अब मध्य प्रदेश के 6 शहरों में नई इकाई लगाकर कचरे से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इससे ये शहर बिजली के लिए किसी ओर संसाधन पर निर्भर नहीं होंगे। इनके पास अपनी खुद की बिजली होगी। इन शहरों में पावर प्लांट लगाने के लिए तैयारी भी शुरू हो गई हैं। इन शहरों में कचरे से यहां 6 से 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बिजली पावर प्लांट बनाने के लिए DPR बनाया जा रहा है।
सबसे बड़ी बात है की वेस्ट प्लास्टिक से यहां पर बिजली बनेगी। शहरों में 50 माइक्रोन या उससे कम की पालीथिन और सूखे कचरे से बिजली तैयार होगी।
एमपी के इन शहरों में कचरे से बनेगी बिजली (Waste To Energy Project In MP)
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रतलाम और सागर में प्लास्टिक वेस्ट और अन्य कचरे से बिजली उत्पादन की योजना बनाई गई है। सबसे पहले यहां पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे उसके बाद रोजाना 6 से 12 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन होगा।
जबलपुर, रीवा में पहले से बन रही कचरे से बिजली
एमपी के जबलपुर और रीवा में पहले से ही कचरे से बिजली बनाने का काम चल रहा है। जबलपुर में सूखे कचरे से 11 मेगावाट और रीवा में 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। जबलपुर नगर निगम बिजली बनाने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात से कचरा ले रहा है जबकि रीवा ने यूपी के प्रयागराज से कचरा लेने का करार किया है।
सूखे कचरे से होगा बिजली उत्पादन
बता दें कि राज्य के 408 नगरीय निकायों से लाखों टन सूखा कचरा निकलता है। राज्य के ज्यादातर निकाय 50 माइक्रान की पालीथिन सीमेंट उद्योगों को दे रहे हैं। इससे अधिक माइक्रान की प्लास्टिक कचरे को उद्योगों को री-यूज के लिए बेचा जा रहा है।
प्रदेश में हर साल 1,38,483 टन प्लास्टिक वेस्ट निकलता है। इनमें इंदौर में 60 हजार टन और भोपाल में 25 हजार 288 टन वेस्ट निकलता है।



