Betul News : सेवा, सरलता और समर्पण की मिसाल: 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होंगे सुबोध शर्मा

Betul News: An example of service, simplicity and dedication: Subodh Sharma will retire on December 31.

Betul News : बैतूल सांसद हो या विधायक या प्रशासनिक अधिकारी, सबके जुबान पर एक शख्यियत का नाम हमेशा रहता है, वह व्यक्ति है सुबोध शर्मा। इन सब के द्वारा उनको महत्व देने का मुख्य कारण है उनका सरल व्यवहार एवं सौंपे गए कार्यों तथा निर्देशों का त्वरित पालन कर बेहतर तरीके से कार्य संपादित करना। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में योजना अधिकारी के पद पर कार्यरत बेहद मधुभाषी एवं कार्य के प्रति बेहद समर्पित सुबोध शर्मा 34 वर्ष की अपनी सरकारी सेवाओं को 31 दिसंबर को विराम दे रहे हैं।
14 में 11 सदस्य शासकीय सेवा में
 चार बहन एवं तीन भाईयों के परिवार में सुबोध शर्मा का क्रम छठवां है। भाई-भाभी, बहन-बहनोई के परिवार के 14 सदस्यों में 11 सदस्य शासकीय सेवा में सेवारत तथा तीन सफल व्यवसायी/गृहणी है। 10 भांजे-भांजी सभी सेवारत हैं। परिवार में आठ डॉक्टर एवं चार पुलिस अधिकारी कार्यरत/सेवानिवृत हैं। सादगी पसंद एवं सामंजस्य पूर्ण दाम्पत्य जीवन को आत्मसात करने वाली धर्मपत्नी निशि शर्मा स्थानीय शासकीय हाईस्कूल में प्राचार्य हैं। बेटा कौस्तुभ शर्मा बेंगलुरू में प्रतिष्ठित एम.एन.सी. में कार्यरत है वहीं बेटी डॉ. स्पंदन शर्मा भोपाल में एम.डी. मेडिसिन हैं।
 – 1992 से प्रारंभ हुआ नौकरी का सफर
 पुलिस विभाग में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर रहे दिवंगत रामबहादुर शर्मा एवं कुमुद शर्मा के पुत्र सुबोध शर्मा ने अपनी प्राथमिक से लेकर स्रातक स्तर तक की शिक्षा ग्वालियर चंबल संभाग से पूरी की। इस दौरान माध्यमिक स्कूल की दो वर्ष की पढ़ाई शा.उ.मा.विद्यालय बैतूल जो वर्तमान में उत्कृष्ट विद्यालय है से प्राप्त की. स्नातकोत्तर उपाधि शासकीय जे.एच.कॉलेज से प्राप्त की। 11 नवंबर 1992 को शासकीय उ.मा.विद्यालय बोरगांव जिला बैतूल से व्याख्याता के पद से अपनी सरकारी सेवा की शुरूआत की.अगस्त 1994 में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सहायक संचालक (औपचारिकेत्तर शिक्षा) के पद से प्रशासनिक क्षेत्र में कदम रखा. इसके बाद प्रशासक एम.आई.एस.,विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक संचालक,जिला परियोजना समन्वयक, जिला परीक्षा प्रभारी, मीडिया प्रभारी जैसे जिम्मेदार पद को सफलतापूर्वक संभालते हुए शिक्षा विभाग में योजना अधिकारी के महत्वपूर्ण पद से 31 दिसंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं।
हमेशा नवाचार करने का शौक रहा
 सुबोध शर्मा को अपनी शासकीय सेवा के दौरान हमेशा नवाचार करने की ललक बनी रही। आधुनिक एवं नवीनतम टेक्नोलॉजी के प्रति विशेष रूझान बना रहा। बैतूल जिले में सर्वप्रथम शिक्षा विभाग से कंप्यूटरीकृत कार्य को प्रोत्साहित किया. सरकारी नौकरी में व्यस्तता के बावजूद हमेशा पढ़ाई-लिखाई के महत्व को प्रोत्साहन देते हुए उसके प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहे। मीडिया साथियों से भी अपार स्नेह एवं सहयोग मिलने से सरकारी योजनाओं का खूब प्रचार-प्रसार कर पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने में सफल रहे। हमेशा टेबल के दूसरी ओर खड़े व्यक्ति की समस्या को समझने के लिए प्रयत्नशील रहे। वंचित समूह, कमजोर वर्ग एवं जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए हमेशा सहज उपलब्ध रहकर उनकी समस्या सुलझाने की पुरजोर कोशिश की। जिले में शिक्षा विभाग की बेहतर छवि स्थापित कर अग्र पंक्ति में इसे रख पाने में अधिकतम सहयोग दिया। राज्य स्तर पर जिले की पहचान बना पाने के लिए हमेशा सक्रिय रहे।
वरिष्ठों-कनिष्ठों से उर्जा मिली
 सुबोध शर्मा बताते है कि उनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों से हमेशा अथाह स्रेह मिला। इस आत्मीय सहयोग के कारण ही वे पूरी उर्जा के साथ काम को अच्छी तरह से संपादित कर पाने में सफल रहे. परिवार से मिले संस्कारों के कारण ही ईमानदारी के उच्चतम शिखर तक पहुंचने के लिए प्रयासरत रहे।
 – अस्वस्थ रहने से परिवारजनों का विशेष लगाव रहा
बचपन में अस्वस्थ रहने से घर के सभी सदस्यों का विशेष लगाव रहा. पिता का सानिध्य अधिक रहा. नाना जी,पिता जी एवं बड़े जीजा जी के व्यक्तित्व का जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ा. पारिवारिक परिस्थतियों के कारण बैतूल से बाहर जाना संभव नहीं हो सका. सरलता, निश्छलता की प्रतिमूर्ति माँ के साथ बड़ी दीदियों से भी माँ तुल्य स्नेह मिला। भाई प्रमोद और विनोद का स्वयं से ज़्यादा इन पर विश्वास, छोटी बहन शशि जोशी का अप्रतिम स्नेह को जीवन में आगे बढ़ पाने के लिए सम्बल मानते हैं, समय-समय पर बड़े भाई प्रमोद शर्मा के व्यवसाय में भी सहयोग किया।
सेवा के प्रति कृत संकल्पित रहेंगे
  सुबोध शर्मा ने बताया कि शासकीय सेवा के दौरान वे हमेशा सेवा कार्य से भी जुड़े रहे हैं। वे सेवानिवृत होने के बाद भी सेवा के ध्येय को निरंतर बनाए रखने एवं परिवार के दायित्वों को त्वरित गति से पूरा करने के प्रति कृत संकल्पित हैं। सेवानिवृत्ति के उपरांत भी उनका शिक्षा विभाग के प्रति सहयोग का कर्तव्य हमेशा बरकरार रहेगा।

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