MP News : मध्यप्रदेश के नक्शे में बड़ा बदलाव: तीन नए जिले और एक नया संभाग बनने की तैयारी
MP News: Major change in the map of Madhya Pradesh: Preparations to create three new districts and a new division

MP News : मध्यप्रदेश के प्रशासनिक और भौगोलिक नक्शे में अब बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। राज्य में तीन नए जिले और एक नया संभाग बनाने की तैयारी चल रही है। इस पुनर्गठन से कई जिलों की सीमाएं नए सिरे से तय होंगी। सबसे अधिक असर राजधानी भोपाल, रीवा और मैहर जिले पर पड़ने वाला है। यह पूरी प्रक्रिया राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग की देखरेख में चल रही है, जिसे दिसंबर 2025 तक मैदानी कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
भोपाल में आठ तहसीलें बनाने की तैयारी
राजधानी भोपाल में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। वर्तमान में जिले में केवल तीन तहसीलें—हुजूर, कोलार और बैरसिया—हैं। हुजूर तहसील का क्षेत्रफल काफी बड़ा होने के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। अब आयोग ने शहर के पांच प्रमुख नजूल सर्किल कार्यालयों को तहसील का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है।
इनमें पुराना भोपाल (सिटी एरिया), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़), गोविंदपुरा, टीटी नगर और एमपी नगर शामिल हैं। इन पांच नई तहसीलों के गठन से भोपाल में कुल आठ तहसीलें हो जाएंगी। इन तहसीलों का सीमांकन विधानसभा क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक और राजनीतिक इकाइयों के बीच तालमेल आसान रहे।
रीवा-मैहर सीमा विवाद ने बढ़ाई सरगर्मी
पुनर्गठन प्रक्रिया के दौरान मैहर के छह गांवों को रीवा जिले में शामिल करने के प्रस्ताव से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। आयोग के अनुसार, यह बदलाव भौगोलिक और प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, लेकिन इससे दोनों जिलों के बीच सीमांकन को लेकर असंतोष की स्थिति बन गई है।
पिपरिया बन सकता है नया जिला
नर्मदापुरम जिले से अलग होकर पिपरिया को नया जिला बनाए जाने की तैयारी है। वर्तमान में यह जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है और पहाड़ी इलाका होने से आवागमन में लगभग दो घंटे लगते हैं। लंबे समय से स्थानीय नागरिक पिपरिया को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रस्ताव पर विचार शुरू कर दिया है।
बीना जिला बनने की राह पर
बीना को जिला बनाने की मांग पिछले 40 वर्षों से जारी है। अब आयोग इसे हरी झंडी देने की तैयारी में है। सागर जिले से लगभग 75 किलोमीटर दूर बीना को जिला बनाया गया तो इसमें खुरई, मालथौन, बांदरी, कुरवाई, पठारी और प्रस्तावित खिमलासा तहसील को शामिल किया जा सकता है। बीना से ही कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने जिला बनाने की मांग को लेकर भाजपा का दामन थामा था।
निमाड़ को मिलेगा नया संभाग
प्रदेश में वर्तमान में 10 संभाग हैं। अब निमाड़ क्षेत्र को अलग संभाग बनाने की दिशा में काम चल रहा है। इसमें खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर और खंडवा जिले शामिल होंगे। पहले से ही 2012 और 2016 में इस प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब आयोग इसे मूर्त रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
निमाड़ को नया संभाग बनाने से इन जिलों के राजस्व कार्य, अपील और निगरानी खरगोन में हो सकेंगे। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और विकास कार्यों की गति तेज होगी। इसके बाद इंदौर संभाग में केवल चार जिले—इंदौर, धार, झाबुआ और अलीराजपुर—रह जाएंगे।
दिसंबर 2025 तक पूरी होगी प्रक्रिया
राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग ने अब तक 25 जिलों में मैदानी कार्य पूरा कर लिया है। अगले तीन महीनों में शेष जिलों का सर्वे पूरा होने की उम्मीद है। आयोग का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक रिपोर्ट सौंपने का है, क्योंकि इसके बाद जनगणना महानिदेशालय द्वारा प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज कर दिया जाएगा।
इस बड़े पुनर्गठन से न केवल प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में कसावट आएगी, बल्कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आने की उम्मीद है।



