MP Weather : एमपी के 14 जिलों से मानसून की विदाई, इन जिलों में बारिश का अलर्ट

MP Weather: Monsoon departs from 14 districts of MP, rain alert in these districts

MP Weather : 26 सितंबर 2025 को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों से विदाई ले ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की यह वापसी प्रदेश के कई जिलों से आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है। इसमें प्रमुख रूप से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर, नीमच, मंदसौर और रतलाम जैसे जिले शामिल हैं। इसके अलावा उज्जैन, राजगढ़ और अशोकनगर जिलों के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी की पुष्टि की गई है। इसका तात्पर्य यह है कि इन क्षेत्रों में अब दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियां समाप्त हो गई हैं और शीतकालीन मौसम की ओर बढ़ने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।

हालांकि, मानसून की वापसी के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों के भीतर बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, एक नया लोकल वेदर सिस्टम बनने के कारण अनेक जिलों में वर्षा के आसार हैं। जिन जिलों में बारिश की संभावना व्यक्त की गई है, उनमें डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, शाजापुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी और दतिया प्रमुख हैं। इसके साथ ही सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा जिलों में भी हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

इन जिलों में बनने वाला लोकल सिस्टम वातावरण में नमी और निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण सक्रिय हो रहा है। इससे इन इलाकों में बादल छाए रह सकते हैं और कहीं-कहीं तेज़ हवाओं के साथ बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों को आगाह किया है कि वे बारिश की संभावना को देखते हुए फसल कटाई, भंडारण और अन्य कृषि कार्यों को सावधानीपूर्वक करें।

बैतूल जिले की बात करें तो वहां बारिश के साथ-साथ कृषि मंडियों में भी हलचल बनी हुई है। 26 सितंबर को बैतूल मंडी में सोयाबीन के भाव में गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे बारिश और फसल की नमी को मुख्य कारण माना जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मंडियों में अनाज लाने से पहले मौसम की स्थिति पर ध्यान दें, जिससे अनाज को नुकसान न पहुंचे।

देश के इन हिस्सों से गया मानसून

दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की बात करें तो यह सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रही है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून 26 सितंबर को गुजरात के कुछ और हिस्सों, पूरे राजस्थान, मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और सम्पूर्ण पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) से वापस लौट चुका है। यह सामान्य रूप से हर साल सितंबर के अंतिम सप्ताह में लौटता है, लेकिन इस बार यह अपेक्षाकृत समय पर ही वापसी कर गया है।

मानसून की वापसी का यह चरण सामान्य मौसम चक्र का हिस्सा है। इस समय तापमान में धीरे-धीरे गिरावट शुरू होती है और आर्द्रता में कमी आती है। अगले कुछ दिनों में प्रदेश के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, जहां मानसून लौट चुका है वहां अब शुष्क मौसम रहेगा, लेकिन जहां लोकल सिस्टम सक्रिय है, वहां बारिश की गतिविधियां अभी कुछ दिन और बनी रह सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश में इस साल मानसून की सक्रियता सामान्य रही, हालांकि कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी देखी गई। पूर्वी मध्यप्रदेश में अपेक्षाकृत अच्छी वर्षा हुई, जबकि पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई। इससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ा, लेकिन सितंबर महीने में हुई छिटपुट बारिश ने कुछ हद तक नुकसान की भरपाई की।

 

वर्तमान में मौसम विभाग की नजर मध्यप्रदेश में बन रहे नए वेदर सिस्टम पर है। यदि यह सिस्टम और अधिक सक्रिय होता है, तो आगामी 2-3 दिनों तक भी बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से जबलपुर, रीवा, सागर, भोपाल और इंदौर संभाग में वर्षा की संभावना बनी रहेगी। इसके साथ ही निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में मानसून की वापसी का दौर आरंभ हो चुका है, लेकिन वर्षा की गतिविधियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। किसानों और आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग की ताज़ा जानकारियों पर नजर बनाए रखें और आवश्यक एहतियात बरतें।

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