Wheat Cultivation : देर से कर रहे हैं गेहूं की बुवाई तो इन बातों का रखें ध्यान, वरना बर्बाद हो जाएगी फसल

Wheat Cultivation : धान की कटाई के साथ ही रबी फसलों के बुवाई का समय भी हो चुका है। अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक रबी फसलों की बुवाई होती है। भारत कृषि प्रधान देश है और यहां अधिकतर किसान जीवन यापन के लिए खेतों पर निर्भर रहते हैं। आज के समय में किस पारंपरिक तरीके से खेती नहीं करते हैं बल्कि खेती में आधुनिकता लाने लगे हैं और आधुनिक तरीके से खेती करने पर उत्पादन भी ज्यादा होता है।
लेकिन कई बार ऐसा होता है गेहूं की फसल लगाते समय किसान कुछ गलतियां कर देते हैं जिसके वजह से उत्पादकता पर नकारात्मक असर होने लगता है। गेहूं की फसल लगाते समय सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि थोड़ी सी भी गलती आपके पूरे मेहनत को बर्बाद कर सकती है।
आज हम आपको गेहूं की फसल से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिसका ध्यान रखकर आप उत्पादन अच्छा कर सकते हैं। तो आईए जानते हैं गेहूं की फसल लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है…
भूमि की नमी का महत्व ( Wheat Cultivation )

कृषि वैज्ञानिक नवीन चंद्र गहत्याड़ी ने जानकारी देते हुए कहा कि किस नमी का फायदा कैसे उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के तुरंत बाद किसानों को गेहूं की बुवाई शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि उसे समय मिट्टी में नमी होती है और मिट्टी में नमी होने से गेहूं की पकड़ ठीक हो जाती है।
जब आप अपने खेतों में गेहूं लगे तो गेहूं के बीजों का छिड़काव नहीं करें बल्कि लाइन लाइन बनाकर उसमें गेहूं की बीज बारीकी से डालें। इससे गेहूं की फसल अच्छी होगी। इसके साथ ही साथ आपको समय-समय पर गेहूं की फसल में खाद का छिड़काव करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उत्पादकता अच्छी होती है।
किसानों को गेहूं को ऐसे उगाना चाहिए

कृषि वैज्ञानिक का मानना है कि किसानों को गेहूं का बीज का छिड़काव नहीं करके प्रतिबद्ध तरीके से लगाना चाहिए। इसके साथ ही साथ एक पंक्ति में लगभग 22 सेंटीमीटर की दूरी होना चाहिए इससे काफी ज्यादा फायदा होगा और बीजों का जमाव अच्छे से होगा।



