Viral Fever: बैतूल में मौसमी बीमारियों ने पसारे पाव, छोटे बच्चें सबसे ज्यादा प्रभावित
Viral Fever: Seasonal diseases spread in Betul, small children are most affected
Viral Fever : बैतूल बारिश के दिनों में मौसमी बीमारियों ने पांव पसार दिए है। इस मौसमी बीमारियों की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आ रहे है। जिला अस्पताल में उपचार करवाने के लिए बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे है। डॉक्टर उपचार के साथ-साथ उन्हें मौसमी बीमारियों से बचने के संबंध में जानकारी दे रहे हैं।
हालात यह हो गए है कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से बच्चा वार्ड भी फुल हो गया है। इन दिनों बारिश के समय उल्टी, दस्त, बुखार, वायरल फीवर ने समूचे जिले में पाव पसार कर रखे है। बच्चों से लेकर युवा तक वायरल बीमारी का शिकार हो रहे है। इसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन वायरल फीवर से पीड़ित लगभग 1 सैकड़ा बच्चे उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे है। एक सैकड़ा बच्चों में से प्रतिदिन 10 बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में बच्चे वायरल बीमारी की चपेट में आने से उपचार करवाने पहुंच रहे है। परिजनों ने जरा भी लापरवाही की और अस्पताल लाने में देरी की तो ऐसे बच्चों को सीधे भर्ती करने की नौबत आ जाती है।
जिला अस्पताल में बच्चा वार्ड फुल
जिला अस्पताल में वायरल फीवर से पीड़ित बच्चे इतनी अधिक संख्या में पहुंच रहे है कि पूरा बच्चा वार्ड फुल हो गया है। अस्पताल में बच्चा वार्ड 30 बेड का है, लेकिन वर्तमान में बच्चा वार्ड में लगभग 40-45 बच्चे भर्ती हैं। बेड की संख्या भी कम पड़ने लगी।
हालात यह भी है कि एक बेड पर दो बच्चों को सुलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में बेड फुल होने की स्थिति में भी किसी बच्चे को भर्ती करने से मना नहीं किया जा सकता, इसलिए स्थिति कैसी भी हो बच्चों को भर्ती कर उन्हें उपचार देना पड़ता हैं। पिछले एक पखवाड़े से वायरल फीवर का शिकार हो रहे बच्चों की संख्या कुछ अधिक बढ़ रही हैं। बच्चा वार्ड के अलावा पीआईसीयू में भी अब बेड फुल हो चुके हैं।
वायरल फीवर से बचने के लिए करें उपाय
जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश घोरे ने बताया कि वायरल फीवर से बचने के लिए बच्चों की केयर करना बहुत जरूरी है। बारिश के दिनों में बच्चों को पानी उबालकर पिलाना चाहिए। शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए पानी अधिक पिलाएं। डॉ. घोरे ने बताया कि घर में किसी को भी सर्दी, खांसी, बुखार होने पर ऐसे व्यक्ति से बच्चों को दूर रखें।
बच्चों को दिन में कई बार साबुन जरूर धुलाएं। इस समय बच्चों को बाहर का खाना खिलाने से बचे। बाहर का खाना खाने से बच्चों को बीमारी फैलने का ज्यादा खतरा बना रहता हैं। बच्चों को साफ पानी पिलाएं। बारिश के दिनों में कई बार खराब पानी पीने से बच्चे बीमार पड़ जाते है।
डॉक्टर का कहना है कि जब भी बच्चे को बुखार, सर्दी, खांसी होने की स्थिति में डॉक्टर को तत्काल दिखाएं, ताकि बच्चों की बीमारी और अधिक ना बढ़ें। बच्चों को बुखार आने की स्थिति में परिजन बिल्कुल भी लापरवाही ना बरतें।
इनका कहना है…
जिला अस्पताल में मौसमी बीमारियों से पीड़ित लगभग 100 बच्चे प्रतिदिन उपचार करवाने पहुंच रहे हैं, जिनमें से लगभग 10 बच्चों को भर्ती करने की नौबत आ जाती है। हालांकि बच्चों को समय पर उपचार मिलने पर वह जल्द ठीक भी हो जा रहे हैं।
डॉ. जगदीश घोरे, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बैतूल



