Betul Road Accident :  बैतूल में सड़क हादसे बने मौत का सबब, 10 माह में 327 लोगों की गई जान

Betul Road Accident: Road accidents become the cause of death in Betul, 327 people lost their lives in 10 months.

Betul Road Accident :  बैतूल जिले में सड़क हादसों का ग्राफ हर साल बढ़ता जा रहा है। तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। यातायात पुलिस की तमाम समझाइश और कार्रवाई के बावजूद जिले में दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस साल भी हालात पिछले वर्षों जैसे ही बने हुए हैं।

जनवरी से अक्टूबर 2025 तक यानी लगभग दस महीनों में जिले में 847 सड़क हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में अब तक 327 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 833 लोग घायल हुए हैं। यह आंकड़े पिछले सालों की तुलना में भी कम नहीं हैं। वर्ष 2024 में जिले में कुल 925 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 352 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 911 लोग घायल हुए थे। वहीं 2023 में 918 सड़क हादसों में 286 लोगों की मौत हुई थी और 1081 लोग घायल हुए थे। इन आंकड़ों से साफ है कि हर साल हादसों का आंकड़ा लगभग समान स्तर पर बना हुआ है, बल्कि मौतों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

जिले में सबसे ज्यादा हादसे फोरलेन और हाईवे पर दर्ज किए गए हैं। तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाना और शराब के नशे में ड्राइविंग करना इन हादसों के प्रमुख कारण हैं। कई स्थानों पर अंधे मोड़ और सड़क की गलत डिज़ाइन के कारण वाहन चालकों को सामने से आने वाला वाहन नजर नहीं आता, जिससे भिड़ंत हो जाती है। पुलिस ने कई स्थानों पर चेतावनी संकेतक और बोर्ड लगाए हैं, लेकिन लोग इनका पालन नहीं करते।

दुर्घटनाओं में मौत का एक बड़ा कारण दोपहिया चालकों द्वारा हेलमेट न पहनना भी है। ज्यादातर मामलों में सिर में गंभीर चोट लगने से मौतें हुई हैं। यातायात पुलिस बार-बार हेलमेट पहनने की हिदायत देती है और चालानी कार्रवाई भी करती है, लेकिन लोग कुछ समय बाद फिर लापरवाही बरतने लगते हैं। यदि लोग हेलमेट पहनने की आदत डाल लें, तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं।

यातायात प्रभारी गजेंद्र केन का कहना है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। “वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। स्कूलों में जाकर बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी दी जाती है, ताकि वे अपने परिवारों को भी जागरूक कर सकें। चालानी कार्रवाई और समझाइश दोनों की जाती है, परंतु जब तक लोग खुद जिम्मेदारी नहीं दिखाएंगे, तब तक हादसों में कमी आना मुश्किल है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन सख्ती से किया जाए, गति सीमा पर नियंत्रण रखा जाए और ड्राइविंग के दौरान सावधानी बरती जाए, तो इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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