Trending News: यहां दुल्हन लेकर आती है दूल्हे के घर बारात, चलता है बहु विवाह प्रथा, बेहद खूबसूरत होती है यहां की लड़कियां

उत्तराखंड अपने संस्कृति के वजह से पूरे देश में प्रसिद्ध है और यहां की खूबसूरती भी देश दुनिया में फेमस है। आज उत्तराखंड की एक ऐसी जनजाति के बारे में बताएंगे जहां लड़कियां लड़कों का बारात लेकर आती है। उत्तराखंड के देहरादून शहर से 103 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उत्तर पश्चिम के तरफ चकराता ब्लॉक है और यहां का इलाका जौनसार बाबर कहलाता है। यहां के लोग खुद को पांडवों का वंशज कहते हैं और यहां संस्कृति और रीतियों में भी पांडवों का जिक्र देखने को मिलता है।
बेहद खास है इनका कल्चर ( Trending News )
इनका कल्चर बेहद खास है और यहां के लोग खुद को पांडवों का वंशज कहते हैं । यह लोग महासू देवता की पूजा करते हैं। दिवाली और विवाह में कई लोग नृत्य किए जाते हैं जो की काफी फेमस है। विवाह आदि समारोह में यहां पर तलवारबाजी भी देखने को मिलता है।
यहां चलता है बहु विवाह

पांडवो की तरह ही एक पत्नी के बहुपतिराजेंद्र बिष्ट ने बताया कि उनके यहां पांडवों की पूजा की जाती है। उन्होंने सुना है कि पांडवों की तरह यहां बहुपति और बहुविवाह प्रथा रही है। यहां पर पांडवों की तरह अधिक पत्नी वाली महिला को पांचाली कहा जाता है।हालांकि यहां अब समझ में समय के साथ बदलाव आ रहा है लेकिन आज भी पुराने बुजुर्गों में कई प्रथाओं की निशानियां देखने को मिलती है।
दूल्हा नहीं दुल्हन लाती है बारात
इस जाति की एक सबसे खास बात यह है कि यहां दूल्हा बारात नहीं लेकर आता है बल्कि यहा दूल्हा के घर दुल्हन बरात लेकर आती है। सदियों से यह प्रथा चली आ रही है जो कि देश दुनिया में चर्चा का विषय बनी है।
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किमावणा पर्व में जश्न के लिए जड़ियों से बनती है
मदिराजौनसार बावर के कंडमान में स्थित लोहारी, जाड़ी, सीजला जैसे क्षेत्रों में किमावणा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।इसके जश्न के लिए जंगल से एक जड़ी लायी जाती है जिसका नाम कीम है। इसे लाकर घर के आंगन में कूटकर मदिरा बनाई जाती है। इस दौरान लोकगीत भी गाए जाते हैं. अपने रिश्तेदारों को आमंत्रित किया जाता है और उनकी दावत भी की जाती है. इस प्रकार ये त्योहार मनाते हैं।



