Success Story: घर के छत पर शुरू की ड्रैगन की खेती, आज करती है हर महीने लाखों रुपए की कमाई, जानें रेमाबाई की कहानी 

 

Success Story
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Success Story : कहते हैं इंसान जब पूरे दिलो जान से कुछ करने की कोशिश करता है तो उसे सफलता हर हाल में मिलती है। ऐसे ही कहानी है केरल की रिटायर्ड टीचर रमा बाई एस की। रेमाबाई केरल की रिटायर्ड टीचर है और रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने अपने घर के छत पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। वह हर महीने 500 किलो ड्रैगन फ्रूट अपने छत पर उगा लेती है और इससे उनकी अच्छी कमाई होती है। रीमा बाई 36 साल तक जूलॉजी की टीचर रही और इसके बाद वह अपने स्कूल में हेड मास्टर रही बाद में उनका रिटायरमेंट हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने घर के छत पर खेती करना शुरू किया और कामयाबी की कहानी लिख दी। तो आईए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी।

अकेलापन दूर करने के लिए शुरू की थी ड्रैगन की खेती (Success Story  )

कोल्‍लम की रहने वाली रेमाबाई की मां उनकी बहन के साथ रहती थीं। बहन का घर उनके बगल में ही है। जब भी रेमाबाई शाम को स्कूल से घर आतीं तो मां इंतजार कर रही होती थीं। मां के निधन के बाद रेमाबाई काफी अकेला महसूस करने लगीं। जब रेमाबाई 15 साल की थीं तब पिता का साया सिर से उठ गया था।

उनकी मां ने अकेले ही अपने 13 बच्‍चों की देखभाल की थी। रेमाबाई के पति काम में व्यस्त रहते थे। उनका बेटा दिल्ली में रहता था। ऐसे में रेमाबाई ने अपनी छत को एक ऐसी प्रयोगशाला के तौर पर चुना जहां वह अपनी ऊर्जा और भावनाओं को पौधों के पोषण में लगा सकें।

बड़े प्लास्टिक बैरल में उगाती हैं फल

रेमाबाई के बेटे ने उन्हें ड्रैगन फ्रूट के कई स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया। इसमें कोलेस्ट्रॉल कम करना और आंखों की रोशनी में सुधार शामिल है। इससे प्रेरित होकर रेमाबाई ने इस फल की खेती करने का फैसला किया। उनके पास ज्यादा खाली जमीन नहीं थी। इसके अलावा, छत पर ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए बहुत सारी मिट्टी की जरूरत होती। वह खुद छत पर मिट्टी नहीं ले जा सकती थीं। इसलिए उन्‍होंने बिना मिट्टी के पौधे लगाने का तरीका अपनाने का फैसला किया। रेमाबाई अपनी छत पर 50 बड़े प्लास्टिक के बैरल में 100 पौधों में ड्रैगन फ्रूट की लाल और पीली किस्मों सहित इस विदेशी फल को उगाती हैं।

 घर पर बनाती है नेचुरल खाद

रेमाबाई ने सूखे पत्तों, सब्जियों के छ‍िलके जैसी प्राकृतिक सामग्री के मिश्रण का उपयोग करके अपनी खुद की ऑर्गेनिक खाद भी बनाई। उनके इस अनोखे तरीके से ड्रैगन फ्रूट के पौधे हरे-भरे और स्वस्थ हुए। रेमाबाई बिना खेतों के पौधे लगाने की विधि से ड्रैगन फ्रूट के पौधों की देखभाल करती हैं। इस तरीके से उन्होंने विशाल भूमि की जरूरत के बिना पौधों को पोषित करने का स्थायी और प्रभावी तरीका खोज लिया है। उनकी पूरी फसल आसानी से बिक जाती है। फसल में से वह कुछ उपज अपने बेटे डॉ कृष्णा अद्वैत को भेजने के लिए बचा लेती हैं।

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