Betul News : कृषि उपज मंडी में मची है खुली लूट, किसानों का दर्द सुनने किसी को फुर्सत नहीं, मंडी के सामने लगी वाहनों की लंबी कतार
उपज तौल के 1500 नही दिए तो उपज तौलने से किया इनकार, 2 से 3 दिन तक मंडी में रहने को मजबूर किसान
Betul News : बैतूल कृषि उपज मंडी बैतूल में उपज लाकर बेचने वाले अन्नदाताओं को कई प्रकार की समस्या से जूझना पड़ रहा है। किसानों की समस्या को कोई दूर नहीं कर सका है। तौल के नाम पर किसानों से उगाही करना आम बात हो गई। तीन-तीन दिन तक नीलामी नहीं होने से किसान ठंड में ही मंडी में राते बिताने के लिए मजबूर है। किसान यह सोचकर कभी नहीं आते तो उन्हें तीन दिन तक ही मंडी में रूकना पड़ेगा। ठंड से बचने के लिए किसान बोरे ओड़कर रात बिताने के लिए मजबूर है। किसानों की इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल रहा है। व्यापारियों और उनके कर्मचारी हम्मालों की खूब मनमानी चल रही है।कृषि उपज मंडी में कई किसानों की उपज के ढेर परिसर में पड़े है। जब इस संबंध में किसानों से चर्चा की तो उन्होंने मंडी की परेशानियों से अवगत कराया। कई किसान दो-दो-तीन-तीन से मंडी में उपज लेकर आए, लेकिन उनकी उपज की नीलामी नहीं हो पाई। किसी की उपज गिली बताकर किनारा रहे है तो किसी किसान ने तौल के लिए राशि देने से मना किया तो उनकी उपज की तौल नहीं कर सके। कुछ किसानों का यह भी आरोप है कि व्यापारियों ने उनकी उपज के ढेर के पास देखा तक नहीं। शुक्रवार, शनिवार से किसान मंडी में ही बैठे है। किसानों को अब सोमवार तक नीलामी का इंतजार करना पड़ेगा। मंडी में उपज लेकर आने वाला किसान बहुत परेशान है।

मंडी के सामने वाहनों की लगी लंबी कतार
कृषि उपज मंडी के सामने उपज लेकर आए, किसानों की लंबी लाईन लगी है। किसानों की उपज की नीलामी समय पर नहीं होने पर किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि वे शनिवार से गाड़ी में उपज बेचने के लिए लाए थे, अभी तक उन्हें मंडी परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। किसान शनिवार से मंडी के सामने वाहन लेकर मंडी में प्रवेश की राह देख रहे है।
नहीं मिलती मंडी में जगह
मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम है। किसानों को उपज डालने के लिए शेड में जगह नहीं मिलती। किसान शेड के बाहर परिसर में ढेर लगाने के लिए मजबूर है। अब तो आवक अधिक होने से परिसर में ही उपज डालने के लिए किसानों को जगह नहीं मिल रही है। शेड में इसलिए जगह नहीं मिल रही कि व्यापारियों ने खरीदी गई उपज के बोरे रखे है। मंडी में शेड के भीतर के साथ-साथ परिसर में भी कई जगह व्यापारियों के बोरे के ढेर लगे है। ना तो परिसर में जगह मिल रही है ना ही शेड के भीतर, किसान परेशान है। मंडी में अव्यवस्था के कारण किसान परेशान है। इस संबंध में चर्चा के लिए कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे और मंडी सचिव सुरेश परते से दूरभाष पर चर्चा करनी चाही लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
किसानों ने बताई अपनी आपबीती
मैंने 40 बोरे मक्का के मंडी में बेचने के लिए लाए है। व्यापारियों ने शनिवार को उपज की खरीदी ही नहीं की। उपज का ढेर मंडी परिसर में लगा हुआ है। व्यापारियों ने खरीदी करने से मना कर दिया। शनिवार, रविवार दो दिन मंडी में रहने के बाद अब सोमवार को नीलामी होने की संभावना है। किसानों को जबरन मंडी में रात भर रूककर ठिठुरना पड़ रहा है।राजू देखमुख, किसान, निवासी खड़लामैंने लगभग 50 बोरे मक्का शनिवार को मंडी में बेचने के लिए लाई थी। व्यापारी ने उपज की नीलामी तो कर दी, लेकिन जब हम्माल उपज तोलने के लिए आए तो वे 1500 रूपए मांग रहे थे। राशि नहीं देने पर उन्होंने मक्का की तौल करने से मना कर दिया। हम्माल किसानों से तौल के लिए मनमाना पैसा मांगते है। इतनी अधिक राशि देना किसानों के लिए संभव नहीं है। तौल के 300 रूपए दे रहा था लेकिन हम्मालों ने नहीं लिए। मंडी में हम्मालों की खूब मनमानी चल रही है। अब दो दिन मंडी में रूकना पड़ रहा है।अमरचंद यादव, किसान, निवासी मण्डईबुर्जुग
शनिवार से मंडी में मक्का का ढेर लगाकर रखा है। व्यापारी कोई नीलामी करने के लिए नहीं आए। सोमवार को खरीदी करने की बात टालकर व्यापारी निकल गए। मैं शुक्रवार शाम को ही मंडी पहुंच गया था। अब मुझे नीलामी की रात देखने के लिए तीन रातें मंडी परिसर में ही काटनी पड़ेगी। अब सोमवार को नीलामी होने की उम्मीद है। मंडी में किसानों को किसी ना किसी प्रकार से परेशान किया जा रहा है।विजय वाड़िवा, निवासी अर्जुनवाड़ी
मैंने लगभग 90 बोरे मक्का बेचने के लिए मंडी में लाई है। व्यापारियों ने मक्का को गिली बताकर खरीदी करने से मना कर दिया और मक्का को घर ले जाने की बात कह रहे थे। किराया भाड़ा देकर बड़ी मुश्किल से मंडी में उपज लेकर आए अब वापस ले जाने की बात कह रहे है। अब सोमवार को खरीदी की उम्मीद है। मंडी में हम्मालों द्वारा तौल के लिए पैसे भी मांगे जाते है। पैसे नहीं देने पर तौल करने से मना कर देते है।राहुल धुर्वे, किसान







