Betul News : ज्वार का रकबा कम, फिर भी रिकार्ड 1169 किसानों ने कराया पंजीयन, अधिकारी भी पीटने लगे माथा
Betul News: Sorghum acreage is low, yet a record 1,169 farmers have registered, leaving officials scratching their heads.
Betul News : बैतूल जिले में इस साल गिरदावरी और किसानों के पंजीयन में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि जिले में ज्वार की बोवनी का रकबा घटने के बावजूद, समर्थन मूल्य पर ज्वार बेचने के लिए 1169 किसानों ने पंजीयन कराया है। यह आंकड़ा अधिकारियों के लिए भी हैरानी का विषय बन गया है, क्योंकि वास्तविकता में खेतों में ज्वार की फसल बहुत कम बोई गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब खेती का रकबा घटा है, तो पंजीयन का आंकड़ा इतना बड़ा कैसे हो गया?कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में ज्वार की बोवनी के लिए 5200 हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया था, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार हकीकत में बोवनी इससे भी कम हुई है। पिछले कुछ वर्षों से किसान ज्वार की खेती में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। कारण साफ है कि ज्वार की फसल पर लागत अधिक और लाभ कम मिलता है। ऐसे में अचानक इस बार पंजीयन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने पूरे कृषि तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि पंजीयन की प्रक्रिया गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर की जाती है। यदि गिरदावरी में ज्वार की फसल दर्ज नहीं है तो पंजीयन का सवाल ही नहीं उठता। इसका मतलब साफ है कि गिरदावरी में भारी लापरवाही या जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। कुछ अधिकारी इस पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं, जबकि अंदरखाने चर्चा है कि फर्जी पंजीयन कर कुछ लोग समर्थन मूल्य पर ज्वार बेचने की तैयारी में हैं। यदि समय रहते इस पर जांच नहीं की गई तो जिले में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल सामने आ सकता है। ऐसे लोग, जिन्होंने वास्तविक रूप से ज्वार की खेती नहीं की, वे भी सरकारी खरीद केंद्रों पर ज्वार बेचकर अनुचित लाभ कमा सकते हैं। इससे न सिर्फ सरकार को आर्थिक नुकसान होगा बल्कि ईमानदार किसानों के अधिकारों पर भी आंच आएगी। कृषि विभाग और प्रशासन को अब इस मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हर पंजीकृत किसान की गिरदावरी और खेतों की भौतिक जांच अनिवार्य की जानी चाहिए। यदि जांच में फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित कर्मचारियों और किसानों दोनों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह मामला केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि किसानों के हक पर चोट है। अब जरूरी है कि जिला प्रशासन तत्काल जांच दल गठित कर पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में इस तरह की धांधलियों पर रोक लग सके।
इनका कहना है…..
मामला अपने संज्ञान में लाया है। गिरदावरी में गड़बड़ी तो नही हुई मैं इसे दिखवाता हू।
अभिजीत सिंह, एसडीएम बैतूल



