UPSC Success Story: 12वीं की परीक्षा में हुए फेल, पिता के साथ कई सालों तक बेचा दूध, संघर्षों से लड़कर उमेश बने IPS, प्रेरणादायक है कहानी

UPSC Success Story
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UPSC Success Story: यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में एक है।परीक्षा को पास करने के लिए इंसान को कठिन परिश्रम करना पड़ता है।देश के अधिकतर बच्चे यूपीएससी की परीक्षा पास करके अफसर बनना चाहते हैं लेकिन इस परीक्षा में सफलता उसी को मिलती है जो कड़ी मेहनत करते हैं और कुछ कर गुजरने का जनून रखते हैं। हर साल अनगिनत युवा इस परीक्षा को देते हैं लेकिन इसमें से सफलता कुछ युवाओं को ही मिलती है।

हालांकि कुछ ऐसे बच्चे होते हैं जो मुश्किलों के आगे हार नहीं मानते हैं और जब तक सफल नहीं होते तब तक लगातार कोशिश करते हैं। आज हम आपको एक ऐसे आईपीएस ऑफिसर की कहानी बताएंगे जो काफी मुश्किलों का सामना किया और अपने पिता के सहयोग से यूपीएससी की परीक्षा पास कर दिखाई।

मुश्किलों से लड़कर आईपीएस बने उमेश (UPSC Success Story)

यह कहानी है आईपीएस अधिकारी उमेश गणपत खांडबहाले की।महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव के रहने वाले उमेश को 12वीं कक्षा की अंग्रेजी परीक्षा में असफलता का सामना करना पड़ा और वह केवल 21 नंबर प्राप्त कर सके। शुरू में वह बोर्डिंग स्कूल में रहते थे लेकिन जब वह इंग्लिश की परीक्षा में फेल हुए तो बोर्डिंग स्कूल छोड़कर घर आ गए। इसके बाद उन्होंने पिता के साथ दूध बेचने का काम शुरू किया।

मुश्किलों से लड़कर बन गए अफसर

फिर भी, भाग्य ने करवट ली और आज वह एक आईपीएस अधिकारी हैं, जो पश्चिम बंगाल के एक जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम कर रहे हैं।उमेश गणपत खंडाबहाले की यात्रा दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का फल है। अंग्रेजी परीक्षा में असफल होने के बावजूद, वह 12वीं क्लास में भी असफल हो गए, जिसके कारण उन्हें औपचारिक शिक्षा छोड़नी पड़ी। पढ़ाई छोड़ने के बाद वह अपने गांव से रोजाना नासिक जा कर दूध बेचते थे।

ओपन स्कूल से पास की 12वीं की परीक्षा

उमेश ने ओपन स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की इसके बाद उन्होंने साइंस में कॉलेज की पढ़ाई की। बाद में उन्हें ग्रेजुएशन की डिग्री भी मिल गई। मुश्किलों से लड़ते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।आख़िरकार उन्होंने आईपीएस परीक्षा पास कर यूपीएससी परीक्षा में 704वीं रैंक हासिल कर सफलता हासिल की।

लोगों के लिए मिसाल है आईपीएस उमेश

उमेश गणपत खंडाबहाले की जर्नी, “12वीं फेल” के हीरो की तरह, दर्शाती है कि कभी-कभी असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। ये कहानियां अनगिनत अन्य लोगों को प्रेरित करती हैं, यह साबित करती हैं कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ, कोई भी किसी भी बाधा को पार कर सकता है और सफलता प्राप्त कर सकता है।

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