Betul political news: शासन- प्रशासन और राजनीति के पचड़े में फंसी निशा बांगरे, कही सारी उम्मीदों पर फिर न जाये पानी

Betul political news: Nisha Bangre stuck in the dilemma of governance-administration and politics

इमेज सोर्स फेसबुक

Betul political news: बैतूल- आमला में सर्वधर्म कार्यक्रम और विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा में आई डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे इन दिनों शासन प्रशासन और राजनीति के पचड़े में  फस गई है। आगे कही ऐसा ना हो को चुनाव तक यही दंगल चलता रहे ना तो डिप्टी कलेक्टर का इस्तीफा मंजूर होगा और ना ही वह चुनाव लड़ पाएगी।

डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे को बैतूल जिले के आमला में सर्वधर्म कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की अनुमति नहीं मिली इसके बावजूद भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समय ही निशा ने राजनीति में आने के संकेत दिए थे। कार्यक्रम की अनुमति नही मिलने से निशा की भाजपा सरकार से खटपट हो गई। इसके बाद वे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात की। तब से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस निशा को टिकट देने की घोषणा कर सकती है लेकिन मामला इस्तीफा को लेकर उलझा हुआ है। अभी तक निशा का इस्तीफा शासन ने मंजूर नहीं किया है। 
हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की कही बात
निशाने कहा कि अगर शासन उसका इस्तीफा मंजूर नहीं करता है, तो वह इस मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट जाएगी। सर्व धर्म सभा के समय अखबार की सुर्खियों में रही निशा बांगरे अब कोई भी पार्टी के लोग तवज्जो नहीं दे रहे हैं। 
आसान नहीं आमला से चुनाव जीतना
निशा को कांग्रेस से टिकट मिल भी जाती है तो चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। एकाएक कांग्रेस मैं आने और टिकट देने पर कई कांग्रेसी कार्यकर्ता नाराज हो जाएंगे।आमला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से मनोज मालवे का दबदबा है। श्री मालवे नही चाहेगे की उनकी टिकट कट जाए और निशा बांगरे चुनाव मैदान में हो। ऐसा होता भी है तो काग्रेस के स्थानीय नेता नाराज हो सकते है। ऐसा हुआ तो निशा का चुनाव जीतना आसान नही होगा। काग्रेस के दंगल में भाजपा एक बार फिर से बाजी मार सकती है। 

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