Lumpy Skin Disease : मध्यप्रदेश के इन जिलों में खतरनाक वायरस का असर, विभाग ने जारी किया अलर्ट

Lumpy Skin Disease: Dangerous virus affects these districts of Madhya Pradesh, department issues alert

Lumpy Skin Disease :  मध्यप्रदेश में एक बार फिर खतरनाक लंपी वायरस (Lumpy Skin Disease) का प्रकोप बढ़ने लगा है। राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में पशु इसकी चपेट में आ चुके हैं। संक्रमण का दायरा बढ़ते ही सरकार और पशुपालन विभाग सतर्क हो गए हैं। प्रभावित जिलों में बीमार पशुओं को अलग रखने और टीकाकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों को एडवाइजरी जारी करते हुए पशुओं के ठिकानों की नियमित सफाई करने, मक्खी-मच्छर और किलनियों जैसे परजीवियों को नियंत्रित रखने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, विभाग ने राज्यस्तरीय कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां लंपी वायरस से संबंधित जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, बड़वानी, सिवनी, सागर और भोपाल जिलों से अब तक लंपी स्किन डिसीज़ के मामले सामने आए हैं। इसके बाद विभाग ने रोग की रोकथाम और उपचार को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. पी.एस. पटेल ने बताया कि लंपी वायरस से बचाव के लिए पशुओं को प्रतिबंधात्मक टीका लगवाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखते ही उसका तत्काल उपचार करवाना चाहिए। डॉ. पटेल ने बताया कि विभाग द्वारा संक्रमण नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक संसाधन जुटा लिए गए हैं। अब तक अप्रैल 2025 से राज्य में 41.5 लाख पशुओं का मुफ्त टीकाकरण किया जा चुका है और यह अभियान अभी जारी है।

लंपी स्किन डिसीज़ के मुख्य लक्षण

लंपी एक वायरस जनित संक्रामक बीमारी है, जो मुख्यतः गो-वंशीय पशुओं में फैलती है। यह प्रायः बरसात के मौसम में अधिक सक्रिय होती है। रोग की शुरुआत में पशुओं को 2–3 दिन तक हल्का बुखार आता है, जिसके बाद शरीर पर गोल उभरी हुई गठानें बनने लगती हैं। यह संक्रमण मुंह, गले और श्वास नली तक फैल सकता है। प्रभावित पशुओं के पैरों में सूजन आ जाती है, दूध उत्पादन घट जाता है, गर्भपात या बांझपन की समस्या हो सकती है, और गंभीर मामलों में मृत्यु भी संभव है।

सरकार ने पशुपालकों से अपील की है कि वे पशुओं में किसी भी असामान्य लक्षण के दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें और संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button