Kharif Fasal Ki Boni: प्री-मानसून की बारिश के बाद बोवनी कार्य शुरू, 4 लाख 40 हजार 500 हेक्टेयर में होगी बोवनी

Kharif Fasal Ki Boni: Sowing work started after pre-monsoon rains, sowing will be done in 4 lakh 40 thousand 500 hectares

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Kharif Fasal Ki Boni: बैतूल जिले के कई क्षेत्रों में प्री-मानसून झमाझम बारिश के बाद कई किसानों ने खरीफ फसल का बोवनी कार्य प्रारंभ कर दिया है। बारिश नहीं होने पर बोवनी करने से पिछड़ रहे किसान बारिश होने का इंतजार कर रहे है। अभी मृग नक्षत्र चल रहा है, इसमें बोवनी कार्य करना अच्छा माना जाता है। फसल की अच्छी पैदावार होती है। अभी प्री-मानसून की बारिश की बोवनी हो जाएगी तो मानसून की बारिश होने पर फसलों को अच्छा पानी मिलेगा। बोवनी को लेकर भी कृषि विभाग ने तैयारियां प्रारंभ कर दी है। इस बार बोवनी के लिए कृषि विभाग की तरफ से 4 लाख 40 हजार 500 हेक्टेयर  रकबा प्रस्तावित किया है। संभवत इसी रकबे के अनुसार बोवनी होने की संभावना बनी है। 

पिछले दो-तीन दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में प्री-मानसून की बारिश हो रही है। 11 जून की रात को जिला मुख्यालय सहित जिले के अधिकतर क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश के बाद अब किसानों ने बोवनी कार्य भी प्रारंभ कर दिया है। किसानों का कहना है कि अभी मृग नक्षत्र चल रहा है। मृग नक्षत्र में बोवनी होती है तो इसे समय पर बोवनी कार्य पूरा होना माना जाता है और फसल भी अच्छी बनती है। अच्छी फसल होने पर उत्पादन भी अच्छा होने की संभावना बनी रहती है। इस बार मानसून के पहले प्री-मानसून की अच्छी बारिश हो रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में लगभग डेढ़ इंच से अधिक बारिश हुई है उन्हीं क्षेत्रों के किसान बोवनी कर सकते है। किसान बोवनी कार्य में करने में जल्दबाजी नहीं करें। कम बारिश में बोवनी करने से बीज अंकुरित नहीं होने का खतरा बना रहता है। इसलिए किसान पर्याप्त बारिश होने के बाद ही बोवनी कार्य प्रारंभ करें। अन्यथा किसानों को बीज का नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। 
बोवनी के लिए 4 लाख 40 हजार का रकबा निर्धारित 
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस वर्ष खरीफ फसल की बोवनी के लिए 4 लाख 40 हजार 500 हेक्टेयर रकबे का लक्ष्य रखा है। इसमें धान के लिए 34300 हेक्टेयर, ज्वार 2300 हेक्टेयर, मक्का 1 लाख 72 हजार 500 हेक्टेयर, कोदोकुटकी 1 हजार हेक्टेयर, अरहर 1800, उड़द 500 हेक्टेयर, मंूग 100 हेक्टेयर, रामतिल 100 हेक्टेयर और तिल 500 हेक्टेयर, मूंगफल्ली 4000 हेक्टेयर, सोयाबीन 2 लाख 6 हजार हेेक्टेयर और कपास के लिए 1200 हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया है। इस रकबे के मुताबिक बोवनी कार्य संपन्न होने की संभावना है। 
मक्के की बोवनी में किसानों की अधिक दिलचस्पी
पिछले कुछ वर्षो से किसान अब मक्के की बोवनी के लिए अधिक दिलचस्पी दिखा रहे है। किसानों का कहना है कि कुछ वर्षो से सोयाबीन की पैदावार अच्छी नहीं हो रही है। लागत निकलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए किसान सोयाबीन की जगह अब मक्का बोवनी में अधिक फोकस कर रहे है। किसान बताते है कि सोयाबीन के दाम भी कुछ वर्षो से अच्छे नहीं मिल रहे है। सोयाबीन 4 हजार रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। सोयाबीन के लिए लागत भी अधिक लगती है और मेहनत भी करना पड़ता है। सोयाबीन की अपेक्षा मक्के में मेहनत कम होती है और अच्छी पैदावार हो जाती है। किसानों को मक्के के दाम अच्छे मिल रहे। मक्का 2300 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। 
इनका कहना…
किसान पर्याप्त पानी होने की स्थिति में ही बोवनी करें, अन्यथा बीज अंकुरण नहीं होने से परेशानी बढ़ सकती है। इस वर्ष खरीफ फसल के लिए 4 लाख 40 हजार 500 हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया है। 
रामवीर सिंह राजपूत, एसडीओ, कृषि विभाग, बैतूल

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