Betul Today News: हिट एंड रन नए कानून को लेकर वाहन चालकों ने हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के कारण जन जीवन पर असर पड़ा। सोमवार को दिनभर यात्री बसों के पहिए थमे रहे। हड़ताल के असर के कारण पेट्रोल पंप पर भी वाहन चालकों की भारी भीड़ लग गई। सब पेट्रोल भरवाने की मसक्कत करने लगे है। दरअसल हड़ताल के कारण ट्रांसपोर्ट का काम भो बंद है।
वाहन चालकों ने 3 जनवरी तक हड़ताल का ऐलान किया है। लोगों को यही लग रहा है कि हड़ताल से पेट्रोल का संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए वाहन चालक पेट्रोल भरवाने में लगे है। बैतूल में सोमवार सुबह से पेट्रोल पम्पों पर वाहनों की कतार लगी है। कोठीबाजार, गंज सहित हाइवे से लगे पेट्रोल पंपों पर सुबह से वाहनों की कतार लगी है। हड़ताल के कारण पेट्रोल की कमी के कारण कोई परेशानी नही हो इसलिए सब पहले से पेट्रोल का इंतजाम करके रख रहे है। जानकारी के मुताबिक कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल खत्म होने की जानकारी भी सामने आई है।
हड़ताल से बंद रही बसें, बढ़ी परेशानी
बैतूल। केंद्र सरकार द्वारा वाहन चालकों को लेकर हाल ही में बनाया गया कानून सरकार की गले की हड्डी बनता जा रहा है। इस कानून में संशोधन को लेकर पहले तो ज्ञापन, निवेदन तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन सोमवार अचानक बस चालकों ने विरोध स्वरूप अपनी अपनी बसें ना चलाने का निर्णय ले लिए। कोठी बाजार मुख्य बसस्टैंड पर बस चालकों ने बसें खड़ी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सैकड़ों की संख्या में अप-डाउन करने वाले सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, बैंक कर्मियों और यात्रियों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि हड़ताल अगले तीन दिनों तक चलेगी। इससे सरकार को करोड़ों रुपए की हानि झेलनी पड़ सकती है। इधर ट्रक ड्रायवरों ने भी मोर्चा खोलकर ट्रांसपोर्टरों के सामने अपने इरादें साफ कर ट्रक चलाने से साफ मना कर दिया है। इसके बाद ट्रांसपोर्टरों को भी इसका नुकसान को झेलना अब उनकी मजबूरी बन गई है।
450 बसों का संचालन अचानक बन्द
सोमवार सुबह जैसे ही यात्री अपनी यात्रा शुरू करने बस स्टैंड पहुंचे स्टैंड पर हंगामा मचा हुआ था। ड्रायवरों ने बस चलाने से साफ मना कर दिया जिसके विरोध बस आपरेटर भी नहीं कर सके। काफी देर तक स्टैंड पर हंगामें जैसी स्थिति देखने को मिली। बस ऑपरेटर हेमन्त वागद्रे ने बताया कि केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया है। वास्तव में यह कानून ड्रायवरों के लिए कहीं से कहीं तक न्याय संगत नहीं है। अब ड्रायवरों ने तीन दिन की हड़ताल कर दी जिसके नुकसान हम बस मालिकों को भी उठाना पड़ रहा है। बसे खड़ी रहने से काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। श्री वागद्रे ने पूरी स्थिति स्पस्ट करते बताया कि चूंकि यह कानून केंद्र सरकार द्वारा संसद में पास करवा लिया गया है। लिहाजा अब इसमें संशोधन की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो चुकी है। अब इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे ट्रक ड्राइवर एसोशिएशन को सुप्रीम कोर्ट का सहारा ही एक मात्र विकल्प बचा हुआ है। इसके माध्यम से ही कानून में संशोधन होना सम्भव है। ड्रायवरों की हड़ताल के बाद जिले में प्रतिदिन चलने वाली 450 बसें खड़ी हुई हैं। अब यह हड़ताल आगे क्या रूप लेती है यह आने वाला समय ही बताएगा।