Betul Nyayalay Decision: भालू का शिकार करने वाले आरोपियों को सश्रम कारावास की सजा

Betul Nyayalay Decision: Rigorous imprisonment to the accused who hunted the bear

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Betul Nyayalay Decision: जंगली भालू का शिकार करने वाले 3 आरोपियों  ओझा पिता किषन, उम्र-52 वर्ष, निवासी काजरीढाना तहसील शाहपुर थाना शाहपुर , मन्नू पिता चतरू उम्र-52 वर्ष, निवासी लौंगनढाना तहसील शाहपुर थाना शाहपुर , जगदीश पिता भैयालाल इवने, उम्र-39 वर्ष, निवासी लौंगनढाना (खोकरा) तहसील शाहपुर थाना शाहपुर को धारा 9/51 वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के अपराध में दोषी पाते हुये  बैतूल न्यायालय प्रथम श्रेणी  ने प्रत्येक आरोपीगण को 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10000-10000 रूपये के जुर्माने से दंडित किया गया।

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यह ता शिकार करने का पूरा मामला
 ए.डी.पी.ओ. अजीत सिंह ने बताया कि  5 जून 2016 को उपवनमण्डालाधिकारी शाहपुर को मुखबिर सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम काजरीढाना रीछ/भालू का अवैध शिकार  किया गया है। उक्त सूचना के आधार पर वन अधिकारी एवं कर्मचारियों का एक वन अमला ग्राम काजरीढाना सरवन के खेत पर बने कुएं पर पंहुचा। कुऐं के आस-पास घूम-फिर कर देखा तो कुएं के किनारे काले रंग के लगभग 6 से 8 इंच लंबे रीछ/भालू के बाल जमीन पर पड़े हुये दिखाई दिये। कुएं के अंदर भी कुछ बाल दिखाई दिये जिन्हें निकलवाया गया और मौके पर ही उन्हें जप्त किया गया। दल के द्वारा आस-पास के क्षेत्र की तलाशी की गई। इस दौरान एक खेत की सीमा से लगे नाले में रेत से बाहर निकले हुये बाल दिखाई दिये। उक्त  स्थान की रेत हटाई गई, रेत हटाने पर काले रंग के रीछ का शव दिखाई दिया। जिसे बाहर निकाला गया जो कि लगभग 3-4 वर्ष के नर रीछ/भालु का शव था। रीछ के चारो पंजे तथा गुप्तांग मौजूद नही थे। मुखबिर सूचना के आधार पर ही वन अमला आरोपी मन्नू के घर पंहुचा वहां उसके साथ जगदीश बैठा हुआ दिखाई दिया। जिससे खेत के पास रेत में दबे मृत रीछ के संबंध में पुछताछ की गई। मन्नु ने उसके पास रखे थैले में से रीछ का पंजा निकालकर दिखाया और उसने यह भी बताया कि वह रीछ का पंजा नाखुन के लिए काटकर लाया है। मौके पर ही मन्नु और जगदीश के पास रखे थैले में से रीछ का पंजा जप्त किया गया। अभियुक्त ओझा से पुछताछ की गई तो उसने अपना जुर्म स्वीकारते हुये यह बताया कि वह रीछ का पंजा कांटकर लाया था और थ्रेसर के उपर लाकर रख दिया है। आरोपी ओझा की सूचना पर उसके घर से रीछ/भालू का पंजा जप्त किया गया। मौके पर ही मौका पंचनामा तैयार किया गया। अभियुक्तगण के विरूद्ध वन अपराध पंजीबद्ध किया गया। अभियुक्तगणों को गिरफ्तार कर उनके संस्वीकृतिकारक कथन लेख किये गये जिसमें उन्होंने अपना अपराध स्वीकार किया। विवेचना के दौरान आरोपीगण के कब्जे से जप्तषुदा वन्यजीव रीछ/भालू के अवशेष परीक्षण हेतु देहरादुन फारेंसिक लैब भेजा गया जिसकी रिपोर्ट धनात्मक प्राप्त हुई। विवेचना उपरांत आरोपीगण के विरूद्ध तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी शाहपुर द्वारा परिवाद पत्र तैयार कर  न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन ने अपना मामला युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित किया जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपीगण को सजा सुनाई एवं जुर्माने से दंडित किया है। इस प्रकरण में मध्य प्रदेश शासन की ओर ADOP अजीत सिंह ने पैरवी की है। शशिकांत सोनारे ने पैरवी में सहयोग किया। 

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