Betul Bank Scam : बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में 1.14 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का पर्दाफाश, सहायक प्रबंधक सहित तीन पर कार्रवाई
Betul Bank Scam: Financial irregularity of Rs 1.14 crore unearthed at the Morkha branch of Bank of Maharashtra; action taken against three individuals, including an assistant manager.

- बैंक के सहायक प्रबंधक एवं अन्य आरोपियों द्वारा खाताधारकों के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला
- नेट बैंकिंग के माध्यम से मोबाइल नंबर बदलकर खातों से निकालते थे राशि*
- खाताधारकों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर एफडी तुड़वाने का आरोप*
- बोरदेही पुलिस ने 03 आरोपियों को पकड़ा, विधि विरुद्ध बालक भी शामिल*
- 06 मोबाइल फोन, सोना-चांदी एवं कार सहित लगभग 22.33 लाख रुपये की संपत्ति जप्त*
- जनवरी 2026 से चल रही थी धोखाधड़ी, कई बार बदले मोबाइल फोन*
- खाताधारकों की राशि रिश्तेदारों एवं अन्य खातों में ट्रांसफर कर खरीदी गई कार*
- पुलिस अधीक्षक श्री वीरेन्द्र जैन के कुशल मार्गदर्शन में बोरदेही पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Betul Bank Scam : पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के कुशल मार्गदर्शन में जिले में आर्थिक अपराधों एवं वित्तीय धोखाधड़ी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश खरपुसे एवं एसडीओपी मुलताई शिवकुमार सिंह के मार्गदर्शन में थाना बोरदेही पुलिस ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में खाताधारकों के साथ हुई कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की है। प्रकरण में बैंक के सहायक प्रबंधक सहित एक अन्य आरोपी तथा एक विधि विरुद्ध बालक की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस द्वारा प्रकरण में छह अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है।
ऐसे किया जाता था कथित वित्तीय घोटाला
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में खाताधारकों की बैंकिंग संबंधी जानकारी एवं नेट बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कथित रूप से धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि बैंक के सहायक प्रबंधक द्वारा अपनी आईडी के माध्यम से नेट बैंकिंग का उपयोग कर खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलने तथा उनकी एफडी तुड़वाने जैसी गतिविधियां की जाती थीं। इसके लिए बैंक मैनेजर एवं आरोपियों द्वारा खाता धारको के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर एफ.डी तुडवाई जाती थी.
जांच में यह भी सामने आया कि जनवरी 2026 से कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं की जा रही थीं तथा इस दौरान लगभग 10 बार मोबाइल नंबर बदले जाने की जानकारी मिली है। खातों से निकाली गई अथवा हस्तांतरित की गई राशि को कथित रूप से रिश्तेदारों एवं अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता था। धोखाधड़ी की राशि से कार सहित अन्य संपत्ति खरीदे जाने की जानकारी भी विवेचना में सामने आई है।
छह अलग-अलग प्रकरणों में दर्ज हुई शिकायतें*
थाना बोरदेही में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा से संबंधित खाताधारकों की शिकायतों पर छह अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना उनके बैंक खातों से राशि निकाली गई अथवा खातों में अनधिकृत लेनदेन किया गया।
दर्ज अपराधों का विवरण
फरियादिया ज्योति रघुवंशी, पति धर्मेंद्र रघुवंशी, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर अपचारी विधि विरुद्ध बालक एवं बैंक ऑफ महाराष्ट्र, मोरखा शाखा के सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे के विरुद्ध कथित रूप से उनके बैंक खाते से 4,86,175 रुपये निकाले जाने के संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
फरियादिया फूलवंती, पति स्वर्गीय मदनलाल सोनी, उम्र 63 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध उनकी अनुमति के बिना बैंक खाते में 2,74,000 रुपये का लेनदेन किए जाने के संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
फरियादी इंद्रेश रघुवंशी, उम्र 50 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध उनकी अनुमति के बिना बैंक खाते में 1,85,786 रुपये का लेनदेन किए जाने के संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
फरियादी भोजराज सोनी, उम्र 61 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर पलाश स्वामी एवं गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध उनकी अनुमति के बिना बैंक खाते में 5,50,000 रुपये का लेनदेन किए जाने के संबंध में अपराध पंजीबद्ध किया गया।
22 अक्टूबर 2026 को फरियादिया रागिनी साहू, उम्र 22 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर मोबाइल नंबर 7583004756 के अज्ञात धारक एवं बैंक शाखा के सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे के विरुद्ध उनके बैंक खाते से कथित रूप से 1,55,371 रुपये निकाले जाने के संबंध में धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 66(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
21 अक्टूबर 2026 को फरियादी विवेक सोनी, निवासी ग्राम मोरखा की शिकायत पर गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध उनकी अनुमति के बिना बैंक खाते से राशि का कथित रूप से फर्जी हस्तांतरण किए जाने के संबंध में धारा 318 भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 66(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
उक्त सभी प्रकरणों में संबंधित बैंक खातों के लेनदेन, राशि के हस्तांतरण तथा आरोपियों की भूमिका के संबंध में विस्तृत विवेचना की जा रही है।
तीन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई, मोबाइल फोन, सोना-चांदी एवं कार जप्त
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन द्वारा आरोपियों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। एसडीओपी मुलताई श्री शिवकुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी बोरदेही निरीक्षक भैयालाल उईके के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई।
पुलिस टीम द्वारा विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलित कर प्रकरण में संलिप्त पाए गए आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा एक विधि विरुद्ध बालक के संबंध में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार आरोपी
1. लुकेश गोखे, पिता गुलाबराव गोखे, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम मोवाड, थाना नरखेड़, जिला नागपुर, वर्तमान निवासी मोरखा, थाना बोरदेही। बैंक ऑफ महाराष्ट्र, मोरखा शाखा में सहायक प्रबंधक।
2. गौरव सूर्यवंशी, पिता जगदीश सूर्यवंशी, उम्र 22 वर्ष, निवासी ग्राम मोरखा, थाना बोरदेही, जिला बैतूल।
3. विधि विरुद्ध बालक
जप्त मशरूका
विवेचना के दौरान आरोपियों से संबंधित स्थानों एवं विधि विरुद्ध बालक के मेमोरेंडम के आधार पर निम्नलिखित संपत्ति जप्त की गई:
06 मोबाइल फोन, जिनकी कुल कीमत लगभग 65,000 रुपये बताई गई है।
सोना, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8,28,000 रुपये है। चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1,40,000 रुपये है। कथित धोखाधड़ी की राशि से खरीदी गई कार, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 12,00,000 रुपये है। इस प्रकार पुलिस द्वारा *कुल लगभग 22,33,000 रुपये का मशरूका जप्त किया गया है। जप्त संपत्ति के स्रोत एवं प्रकरण से उसके संबंध की जांच की जा रही है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
उक्त कार्रवाई एसडीओपी मुलताई श्री शिवकुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं थाना प्रभारी बोरदेही निरीक्षक भैयालाल उईके के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में उपनिरीक्षक पंचमसिंह उईके, सहायक उपनिरीक्षक कमलसिंह मेहर, सहायक उपनिरीक्षक मिंतलाल धुर्वे, सहायक उपनिरीक्षक हरीराम डंढोरे, प्रधान आरक्षक नागेंद्र सिंह तथा आरक्षक नीरज, शशिकांत आरसे, रोहित, राधेश्याम, भगवानदास, उमेश, रोहन उईके, महिला आरक्षक अश्विनी, आरती पवार एवं चालक आरक्षक किशोर साहू, गोपाल पवार सहित थाना बोरदेही पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साइबर सेल बैतूल की टीम से उपनिरीक्षक उत्तमनंदन मस्तकार एवं आरक्षक राजेंद्र धाड़से ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन द्वारा प्रकरण में त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों की पहचान एवं गिरफ्तारी तथा महत्वपूर्ण संपत्ति जप्त करने वाली पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की गई है।



