Betul Mandi Bhav 25 September 2023: आज 25 सितंबर 2023 के मंडी भाव, 6 दिन बाद मंडी में खरीदी शुरू, किसानों ने ली राहत की सांस

Betul Mandi Bhav 25 September 2023: Today's market price of 25 September 2023, purchasing started in the market after 6 days, farmers heaved a sigh of relief.

Betul Mandi Bhav 25 September 2023: बैतूल में  6 दिन बाद कृषि उपज मंडी में उपज की खरीदी होने से किसानों ने राहत की सांस ली है। मंडी में खरीदी तो शुरू हुई, लेकिन बहुत अधिक आवक नहीं रही। हड़ताल और छुट्टियों के कारण 19 सितम्बर से मंडी बंद थी। सोमवार को मंडी खुली और उपज की खरीदी की शुरूआत हुई। मंडी में खरीदी शुरू होने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। सप्ताह के पहले दिन मंडी में सोयाबीन और गेहंू की सबसे ज्यादा आवक रही है। हालांकि दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 6 दिन पहले मंडी में जो उपज के दाम थे, 6 दिन बाद भी वही लगभग वही दाम रहे। पिछले कुछ दिनों से मंडी में आवक कम हो रही है। प्रतिदिन लगभग दो से तीन हजार बोरे की आवक है। सोमवार को भी लगभग इतने ही बोरे आवक होने की संभावना है। किसानों का कहना है कि मंडी में 6 दिनों तक खरीदी नहीं होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा।कुछ किसानों को गांव के ही छोटे व्यापारियों को कम कीमत में सोयाबीन बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

नई उपज के बाद बढ़ेगी आवक
फसल की कटाई के बाद नई उपज आने पर मंडी में बम्पर आवक होगी। अभी किसानों के पास बेचने के लिए बहुत अधिक उपज नहीं है। कई किसान पहले ही उपज बेच चुके है। एक महीने के बाद सोयाबीन सहित अन्य उपज की कटाई हो जाएगी। कटाई के बाद मंडी में बम्पर आवक रहेगी। सीजन पर मंडी में इतनी अधिक आवक होती है कि उपज डालने के लिए मंडी परिसर भी कम पड़ जाता है। आवक अधिक होने की स्थिति में किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक महीने बाद मक्का और सोयाबीन की मंडी में सबसे ज्यादा आवक रहेगी। 
सोयाबीन के नहीं मिल रहे दाम
मंडी में कई महीनों से सोयाबीन की उपज को अच्छे दाम नहीं मिल रहे है। जिसके कारण किसान नाराज दिखाई दे रहे है। नई उपज आने की स्थिति में सोयाबीन के दाम यही रहे तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। किसान नई उपज को अच्छे दाम मिलने की अभी से आस लगाए हुए है। जानकारी के मुताबिक कृषि उपज मंडी में सोयाबीन के अधिकतम दाम 4600 और न्यूनतम दाम 4000 रूपए के आसपास है। किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत मिल रही है कि उपज की लागत मिलना भी मुश्किल हो जा रहा है। सोयाबीन की उपज बेचने वाले किसानों को सबसे ज्यादा घाटा सहन करना पड़ रहा है। 

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